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दो दिनों में इजरायल में भारी तबाही, 7 अमेरिकी विमान स्वाहा; रूस-चीन की संभावित मदद को लेकर कन्फ्यूजन!

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एबीसी नेशनल न्यूज | तेहरान / रियाद / बगदाद / वाशिंगटन | 14 मार्च 2026

मध्य-पूर्व में जारी अमेरिका-ईरान टकराव पिछले दो दिनों में और अधिक विस्फोटक होता दिखाई दे रहा है। क्षेत्र से आ रही अलग-अलग रिपोर्टों के मुताबिक Israel में भी भारी नुकसान की खबरें सामने आई हैं, जबकि अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान को भी बड़ा झटका लगा है। विभिन्न घटनाओं में अमेरिकी वायुसेना से जुड़े कुल सात विमानों के नष्ट या दुर्घटनाग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या Iran को इस संघर्ष में Russia या China से किसी तरह की रणनीतिक या तकनीकी मदद मिल रही है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और स्थिति को लेकर काफी भ्रम बना हुआ है।

सूत्रों और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार पिछले दो दिनों में अमेरिकी वायुसेना के सात विमानों के नुकसान की बात सामने आई है। इनमें से दो विमान इराक में दुर्घटनाग्रस्त हुए, जिनमें छह सैनिकों की मौत की पुष्टि की गई है। यह घटना इराक की राजधानी Baghdad के आसपास के इलाके में हुई बताई जा रही है, जहां अमेरिकी सैन्य गतिविधियां लंबे समय से मौजूद हैं और क्षेत्र पहले से ही संवेदनशील माना जाता है।

इसी दौरान खाड़ी क्षेत्र में एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब ईरान ने Saudi Arabia में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर मिसाइल हमला किया। रिपोर्टों के अनुसार यह हमला Prince Sultan Air Base पर किया गया, जहां अमेरिकी वायुसेना के कई रणनीतिक विमान तैनात थे। इस हमले में पांच अमेरिकी रिफ्यूलिंग विमान पूरी तरह नष्ट हो गए। हालांकि इस हमले में कितने सैनिक हताहत हुए हैं, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

इस बीच इजरायल में भी बड़े पैमाने पर नुकसान और सुरक्षा अलर्ट की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। सुरक्षा एजेंसियों और सैन्य सूत्रों का कहना है कि हालात तेजी से बदल रहे हैं और कई मोर्चों पर गतिविधियां बढ़ गई हैं, जिसके कारण स्थिति को लेकर स्पष्ट तस्वीर अभी सामने नहीं आ पा रही है।

मध्य-पूर्व के सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि हाल के घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि संघर्ष अब सीमित झड़पों से आगे बढ़कर बड़े सैन्य टकराव की दिशा में बढ़ सकता है। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के कई सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, जबकि ईरान लगातार इन ठिकानों को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा बताता रहा है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच बढ़ती सैन्य कार्रवाई पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

विश्लेषकों के बीच यह भी चर्चा है कि ईरान की सैन्य क्षमताओं में हाल के वर्षों में काफी वृद्धि हुई है और वह मिसाइल तथा ड्रोन तकनीक में तेजी से आगे बढ़ा है। कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यदि ईरान को रूस या चीन जैसे देशों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तकनीकी सहयोग मिलता है तो इससे संघर्ष का संतुलन बदल सकता है। हालांकि इन दावों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, जिससे स्थिति को लेकर भ्रम बना हुआ है।

स्थिति को देखते हुए खाड़ी क्षेत्र के कई देशों ने सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस टकराव को व्यापक युद्ध में बदलने से रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयासों पर नजर रखे हुए है। यदि संघर्ष इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है।

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