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जंग के बीच ईरान ने चीन को भेजा 1.1 करोड़ बैरल तेल, होर्मुज से जारी है सप्लाई

एबीसी नेशनल न्यूज | तेहरान/ बीजिंग | 11 मार्च 2026

युद्ध में भी तेल सप्लाई जारी

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध के बीच भी ईरान ने अपने तेल निर्यात को जारी रखा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक ईरान ने 11 मिलियन (करीब 1.1 करोड़) बैरल से अधिक कच्चा तेल होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भेजा है। खास बात यह है कि यह पूरा तेल चीन के लिए रवाना किया गया है। शिपिंग डेटा के हवाले से सामने आई इस जानकारी ने वैश्विक ऊर्जा बाजार और भू-राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना रणनीतिक केंद्र

दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय ध्यान का केंद्र बन गया है। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह संकरा समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में युद्ध के माहौल में भी ईरान का इस मार्ग से लगातार तेल भेजना यह संकेत देता है कि ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने की कोशिश जारी है।

चीन बना ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार

रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे तेल निर्यात का गंतव्य चीन रहा है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और राजनीतिक दबावों के बावजूद चीन लंबे समय से ईरानी तेल का प्रमुख खरीदार बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि चीन के लिए यह तेल उसकी ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है, जबकि ईरान के लिए यह आर्थिक जीवनरेखा की तरह काम कर रहा है।

युद्ध और ऊर्जा बाजार पर असर

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण पहले ही वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। ऐसे में ईरान द्वारा लगातार तेल निर्यात की खबर ने बाजार में नई हलचल पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की रुकावट आती है तो इसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है, क्योंकि इस रास्ते से गुजरने वाले टैंकरों की संख्या बेहद बड़ी है।

भू-राजनीतिक समीकरणों पर भी नजर

ईरान से चीन को लगातार तेल भेजे जाने को केवल आर्थिक गतिविधि के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे भू-राजनीतिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह पश्चिम एशिया के बदलते समीकरणों और वैश्विक शक्तियों के बीच ऊर्जा राजनीति की एक नई तस्वीर पेश करता है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच यह घटनाक्रम साफ संकेत देता है कि युद्ध और कूटनीतिक दबावों के बावजूद ऊर्जा व्यापार की धारा पूरी तरह थमी नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संघर्ष की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच तेल आपूर्ति और वैश्विक बाजार किस दिशा में जाते हैं।

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