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ट्रंप प्रशासन के खिलाफ अदालत पहुंची एंथ्रोपिक, फैसले को बताया मनमाना और गैरकानूनी

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एबीसी नेशनल न्यूज | अंतरराष्ट्रीय डेस्क | 10 मार्च 2026

अमेरिकी प्रशासन के फैसले को कोर्ट में चुनौती

अमेरिका की प्रमुख टेक कंपनी एंथ्रोपिक ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया है। कंपनी ने आरोप लगाया है कि सरकार ने उसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम बताकर जिस तरह से ब्लैकलिस्ट किया, वह पूरी तरह मनमाना और गैरकानूनी है। एंथ्रोपिक का कहना है कि इस फैसले से कंपनी की प्रतिष्ठा और कारोबार दोनों पर गंभीर असर पड़ा है।

पेंटागन के फैसले से शुरू हुआ विवाद

मामले की शुरुआत तब हुई जब अमेरिकी रक्षा विभाग ने एंथ्रोपिक को उन कंपनियों की सूची में डाल दिया जिन्हें सरकार के लिए जोखिम माना गया। इसके बाद रक्षा विभाग से जुड़े कई ठेकेदारों को कंपनी के साथ काम करने से बचने की सलाह दी गई। तकनीकी क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक यह कदम काफी असामान्य है, क्योंकि इस तरह की सूची में आमतौर पर विदेशी या संदिग्ध कंपनियों को रखा जाता है।

बिना सबूत कार्रवाई का आरोप

एंथ्रोपिक ने अदालत में दायर याचिका में कहा है कि सरकार ने बिना किसी ठोस आधार के उसे इस सूची में डाल दिया। कंपनी का कहना है कि उसे अपनी सफाई देने का मौका भी नहीं दिया गया और सीधे प्रतिबंध जैसे कदम उठा लिए गए। कंपनी ने इसे अपने संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है और अदालत से इस फैसले को तुरंत रद्द करने की मांग की है।

सैन्य परियोजनाओं को लेकर मतभेद

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद तकनीक के सैन्य इस्तेमाल को लेकर बढ़े मतभेदों से जुड़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि कंपनी अपनी तकनीक के कुछ इस्तेमालों को लेकर सख्त शर्तें रखती रही है, खासकर निगरानी और स्वचालित हथियारों जैसे क्षेत्रों में। इन्हीं मुद्दों को लेकर रक्षा विभाग और कंपनी के बीच तनाव बढ़ता गया।

कारोबार और निवेश पर पड़ सकता है असर

कंपनी ने अदालत को बताया कि सरकार की कार्रवाई से उसके कई संभावित सरकारी ठेके और निवेश प्रभावित हो सकते हैं। टेक उद्योग में भी इस मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है, क्योंकि इससे सरकार और निजी तकनीकी कंपनियों के बीच संबंधों पर असर पड़ सकता है।

अदालत के फैसले पर टिकी नजर

इस मुकदमे ने अमेरिका की तकनीकी दुनिया में नई बहस छेड़ दी है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि अदालत का फैसला भविष्य में सरकार और तकनीकी कंपनियों के बीच सहयोग की दिशा तय कर सकता है। फिलहाल इस मामले पर सबकी नजर अमेरिकी अदालत की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है।

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