टेक्नोलॉजी / एंटरटेनमेंट | मालविका | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 27 अप्रैल 2026
डिजिटल दौर में संगीत की दुनिया तेजी से बदल रही है और अब यह बदलाव सिर्फ सुरों तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि तकनीक ने गाने की आत्मा तक को छू लिया है। हाल के दिनों में इंटरनेट पर ऐसे गानों की भरमार देखने को मिल रही है, जिन्हें सुनकर यह तय कर पाना बेहद मुश्किल हो गया है कि उन्हें किसी इंसान ने गाया है या मशीन ने तैयार किया है। खास बात यह है कि ये गाने पुराने दौर के मशहूर गायकों की आवाज जैसी लगते हैं। कई लोग इन्हें सुनकर यही मान लेते हैं कि यह आवाज अल्का याज्ञनिक या उदित नारायण की है, जबकि हकीकत में ये पूरी तरह AI से तैयार किए गए गीत होते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने अब संगीत के क्षेत्र में ऐसी एंट्री कर ली है, जिसने असली और नकली के बीच की रेखा को लगभग मिटा दिया है। इंटरनेट पर मौजूद कई यूट्यूब चैनल और म्यूजिक प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे गाने अपलोड किए जा रहे हैं, जिन्हें AI टूल्स की मदद से बनाया गया है। ये टूल्स किसी भी सिंगर की आवाज की नकल इतनी बारीकी से कर लेते हैं कि आम श्रोता तो क्या, कई बार संगीत जानकार भी भ्रमित हो जाते हैं। यही वजह है कि अब लोग गाना सुनने के बाद कमेंट में पूछते नजर आते हैं—“ये गायक कौन है?” और जवाब में पता चलता है कि वह कोई इंसान नहीं, बल्कि एक एल्गोरिद्म है।
दिलचस्प बात यह है कि इन AI गानों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। कुछ चैनल्स ने तो महज कुछ महीनों में लाखों व्यूज और हजारों सब्सक्राइबर्स हासिल कर लिए हैं। पुराने हिट गानों को नए अंदाज में पेश करना, या किसी लोकप्रिय फिल्मी गीत को किसी दूसरे गायक की आवाज में पेश करना—ये सब अब तकनीक के दम पर संभव हो गया है। उदाहरण के तौर पर, कई प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे गाने वायरल हो रहे हैं जिनमें किसी फिल्म का गीत है, लेकिन आवाज किसी और प्रसिद्ध गायक जैसी बनाई गई है।
हालांकि, इस ट्रेंड के साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है—क्या इन गानों को स्पष्ट रूप से “AI जनरेटेड” बताना जरूरी नहीं होना चाहिए? क्योंकि जब श्रोता को यह पता ही न चले कि वह जो सुन रहा है वह असली है या मशीन से बना है, तो यह पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन गानों पर लेबल नहीं लगाया गया, तो भविष्य में भ्रम और बढ़ सकता है और कलाकारों की मौलिक पहचान भी प्रभावित हो सकती है।
कॉपीराइट का मुद्दा भी यहां अहम हो जाता है। कई क्रिएटर्स इस समस्या से बचने के लिए गानों के बोल और धुन में हल्का बदलाव कर देते हैं, ताकि उन पर सीधा कॉपीराइट दावा न हो। लेकिन इससे यह भी साफ होता है कि तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ रचनात्मकता के लिए ही नहीं, बल्कि नियमों से बचने के लिए भी किया जा रहा है। कई बार AI गानों में शब्दों की गड़बड़ी या अजीब उच्चारण भी सुनने को मिलते हैं, जो यह संकेत देते हैं कि यह पूरी तरह इंसानी गायकी नहीं है।
इस बीच, AI का सकारात्मक पहलू भी नजर आता है। नए कलाकारों के लिए यह तकनीक एक बड़ा मंच बन रही है, जहां वे बिना बड़े स्टूडियो या संसाधनों के भी संगीत तैयार कर सकते हैं। भक्ति गीतों से लेकर रोमांटिक गानों तक, हर तरह का कंटेंट अब AI के जरिए बनाया जा रहा है और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
AI संगीत की दुनिया में एक नई क्रांति लेकर आया है। लेकिन इसके साथ पारदर्शिता, कॉपीराइट और नैतिकता जैसे सवाल भी उतनी ही तेजी से उठ रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या AI गानों के लिए कोई स्पष्ट नियम बनाए जाते हैं या यह तकनीक इसी तरह संगीत की परिभाषा को बदलती रहेगी।




