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गहलोत ने किया पायलट का बचाव, बीजेपी पर साधा निशाना; राजस्थान की राजनीति में बदली ‘केमिस्ट्री’

राजनीति | अखलाक अहमद | ABC NATIONAL NEWS | जयपुर | 27 अप्रैल 2026

राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। लंबे समय तक चली खींचतान और सार्वजनिक बयानबाजी के बाद अब अशोक गहलोत ने सचिन पायलट को लेकर नरम रुख अपनाया है। गहलोत ने न सिर्फ पायलट का बचाव किया, बल्कि भारतीय जनता पार्टी पर भी तीखा पलटवार किया, जिससे प्रदेश की सियासत का तापमान फिर बढ़ गया है। जयपुर में दिए गए अपने बयान में गहलोत ने 2020 के चर्चित ‘मानेसर प्रकरण’ का जिक्र करते हुए कहा कि सचिन पायलट अब उस दौर से सीख ले चुके हैं। उन्होंने कहा, “सचिन पायलट जी को अनुभव हो गया है कि इस तरह की गलती करने के क्या अंजाम होते हैं। अब वे समझ भी गए हैं और संभल भी गए हैं।” गहलोत का यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि एक समय ऐसा भी था जब दोनों नेताओं के बीच खुली बयानबाजी और तीखा राजनीतिक टकराव देखने को मिला था।

दरअसल, साल 2020 में राजस्थान कांग्रेस के भीतर बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया था, जब पायलट खेमे के विधायक हरियाणा के मानेसर में डेरा डाले हुए थे। उस समय पायलट को उपमुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था और दोनों नेताओं के बीच लंबे समय तक जुबानी जंग चली। लेकिन अब गहलोत का बदला हुआ रुख इस बात का संकेत देता है कि पार्टी के भीतर रिश्तों को सुधारने की कोशिश की जा रही है और पुराने मतभेदों को पीछे छोड़ने का प्रयास हो रहा है।

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गहलोत ने इस दौरान भाजपा नेता राधा मोहन अग्रवाल के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें पायलट को लेकर विवादित टिप्पणी की गई थी। अग्रवाल ने कहा था कि पायलट “बहुरूपिया” हैं और उनकी एक टांग कांग्रेस में और दूसरी कहीं और रहती है। इस पर गहलोत ने पलटवार करते हुए कहा, “अब उनकी दोनों टांगें कांग्रेस में हैं और कांग्रेस में ही रहेंगी। जो लोग उन्हें गुमराह करके मानेसर ले गए थे, उनके मंसूबे अब पूरे नहीं होंगे।” इस जवाब के जरिए गहलोत ने न सिर्फ पायलट के प्रति समर्थन जताया, बल्कि बीजेपी पर भी सीधा हमला बोला।

गहलोत का यह बयान न सिर्फ पायलट के प्रति बदले हुए रुख को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि कांग्रेस राजस्थान में एकजुटता का संदेश देना चाहती है। हाल ही में दिल्ली में कांग्रेस ओबीसी सेल की बैठक के दौरान भी दोनों नेताओं के बीच अच्छी ‘केमिस्ट्री’ देखने को मिली थी। गहलोत और पायलट ने न सिर्फ एक-दूसरे से गर्मजोशी से मुलाकात की, बल्कि मीडिया के सामने मुस्कुराते हुए तस्वीरें भी खिंचवाईं। उस समय गहलोत ने हल्के अंदाज में कहा था, “फोटो खींच लो, फिर आप कहोगे कि दोनों में बनती नहीं है।”

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान भी चाहता है कि राजस्थान में किसी तरह का आंतरिक विवाद सामने न आए। यही वजह है कि दोनों नेताओं के बीच सुलह और एकजुटता की कोशिशें तेज हुई हैं। गहलोत का यह बयान उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें पार्टी एक मजबूत और एकजुट छवि पेश करना चाहती है।

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हालांकि, यह भी सच है कि राजस्थान कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान पूरी तरह खत्म हुई है या नहीं, इस पर अभी भी सवाल बने हुए हैं। लेकिन फिलहाल जो तस्वीर सामने आ रही है, उसमें दोनों बड़े नेता सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे के समर्थन में नजर आ रहे हैं और पार्टी के भीतर एकजुटता दिखाने की कोशिश जारी है।

गहलोत का यह बयान प्रदेश की राजनीति में एक नया संदेश देता है—टकराव से सहयोग की ओर बढ़ने का। अब देखना यह होगा कि यह बदली हुई ‘केमिस्ट्री’ चुनावी मैदान में कांग्रेस को कितना फायदा पहुंचाती है और क्या यह एकजुटता लंबे समय तक कायम रह पाती है या नहीं।

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