एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 9 मार्च 2026
मध्यपूर्व में तेजी से बिगड़ते हालात और उसके असर को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। संसद के बाहर विपक्षी दलों ने सोमवार को प्रदर्शन करते हुए सरकार से पश्चिम एशिया के हालात, बढ़ते ईंधन दाम और भारतीयों की सुरक्षा पर तत्काल चर्चा की मांग की।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब पूरा मध्यपूर्व संघर्ष की आग में जल रहा है और लाखों भारतीय वहां काम कर रहे हैं, तब केंद्र सरकार संसद में इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा से बच रही है। उन्होंने कहा कि तेल की कीमतों में अनिश्चितता, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित असर जैसे विषय बेहद महत्वपूर्ण हैं, लेकिन प्रधानमंत्री इन पर खुलकर बहस नहीं चाहते।
राहुल गांधी ने तीखे शब्दों में कहा कि मध्यपूर्व में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं, भारतीय वहां फंसे हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ती जा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत को अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर चलना चाहिए और किसी भी वैश्विक दबाव के आगे झुकना नहीं चाहिए।
इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने संसद परिसर के बाहर प्रदर्शन कर सरकार से जवाब मांगा। विपक्ष का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की स्थिति का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और करोड़ों भारतीय प्रवासी कामगारों पर पड़ सकता है।
विपक्षी नेताओं का दावा है कि खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ से अधिक भारतीय काम करते हैं और वहां किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष का असर सीधे भारत पर पड़ेगा। इसके अलावा तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से देश की अर्थव्यवस्था पर भी भारी दबाव पड़ सकता है।
इधर संसद के भीतर भी इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिली। विपक्षी सांसदों ने सरकार से विस्तृत बयान और चर्चा की मांग की, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि सरकार हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और विदेश मंत्रालय स्थिति के अनुसार आवश्यक कदम उठा रहा है।
विपक्ष का आरोप है कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद संसद में गंभीर चर्चा नहीं होने देना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। वहीं सरकार का कहना है कि भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है, जिसके लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
मध्यपूर्व के हालात और उससे जुड़े आर्थिक प्रभावों को लेकर देश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है, जबकि आम आदमी की चिंता इस बात को लेकर है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो तेल की कीमतों और महंगाई पर इसका क्या असर पड़ेगा।




