एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 7 मार्च 2026
देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाने वाली संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में सफलता हासिल करना हर किसी के बस की बात नहीं होती। लेकिन अगर यह सफलता बीमारी, दर्द और निराशा के लंबे दौर से गुजरने के बाद मिले तो उसकी अहमियत और भी बढ़ जाती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है अथिरा सुगथन की, जिन्होंने जिंदगी के बेहद कठिन दौर का सामना करते हुए UPSC परीक्षा में 483वीं रैंक हासिल कर अपने सपने को सच कर दिखाया।
अथिरा सुगथन शुरू से ही पढ़ाई में गंभीर और मेहनती छात्रा रही हैं। उनका सपना था कि वे सिविल सेवा में जाकर देश और समाज के लिए काम करें। इसी लक्ष्य के साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और UPSC की तैयारी शुरू कर दी। सब कुछ ठीक चल रहा था और वे पूरी लगन से पढ़ाई कर रही थीं, लेकिन अचानक उनकी जिंदगी में एक ऐसा दौर आया जिसने सब कुछ बदलकर रख दिया।
कुछ समय बाद अथिरा गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझने लगीं। बीमारी का असर इतना गहरा था कि करीब दो साल तक उनकी याददाश्त पर असर पड़ा और उन्हें बहुत सी चीजें याद रखने में कठिनाई होने लगी। हालत यहां तक पहुंच गई कि कई बार उन्हें सामान्य काम करने में भी परेशानी होती थी। इसी दौरान उनकी शारीरिक स्थिति भी कमजोर हो गई और एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ा।
एक ऐसी छात्रा के लिए, जिसका सपना देश की सबसे कठिन परीक्षा पास करना था, यह दौर बेहद कठिन और निराशाजनक था। कई लोगों के लिए ऐसी स्थिति में अपने सपनों को छोड़ देना आसान होता है, लेकिन अथिरा ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने मुश्किल हालात को अपनी कमजोरी बनने के बजाय उसे चुनौती की तरह लिया।
इस कठिन समय में उनके परिवार ने उनका पूरा साथ दिया। डॉक्टरों के इलाज और परिवार की देखभाल से धीरे-धीरे उनकी सेहत में सुधार आने लगा। इसी दौरान अथिरा ने तय किया कि वे अपने सपनों को टूटने नहीं देंगी। उन्होंने फिर से पढ़ाई शुरू करने का फैसला किया, भले ही इसके लिए उन्हें शुरुआत से मेहनत क्यों न करनी पड़े।
जब उन्होंने दोबारा किताबें उठाईं तो यह सफर आसान नहीं था। कई विषय उन्हें फिर से समझने पड़े, कई चीजें दोबारा पढ़नी पड़ीं। लेकिन उन्होंने धैर्य और आत्मविश्वास बनाए रखा। धीरे-धीरे उनकी तैयारी पटरी पर आने लगी। वे रोज नियमित रूप से पढ़ाई करती रहीं, नोट्स बनाती रहीं और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र हल करके अपनी तैयारी को मजबूत करती रहीं।
लंबे संघर्ष और लगातार मेहनत का परिणाम आखिरकार सामने आया। जब UPSC 2025 का परिणाम घोषित हुआ, तो अथिरा सुगथन का नाम सफल उम्मीदवारों की सूची में था। उन्होंने 483वीं रैंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि हौसला मजबूत हो तो कोई भी मुश्किल आदमी को उसके लक्ष्य तक पहुंचने से रोक नहीं सकती।
आज अथिरा सुगथन की कहानी देश भर के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। दो साल तक याददाश्त की समस्या, शारीरिक कमजोरी और व्हीलचेयर तक पहुंच जाने जैसी कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने सपने को जिंदा रखा और अंततः उसे हासिल कर लिया।
उनकी यह सफलता सिर्फ एक परीक्षा में मिली रैंक नहीं है, बल्कि यह उस जिद, धैर्य और आत्मविश्वास की जीत है जो इंसान को सबसे कठिन हालात में भी आगे बढ़ने की ताकत देता है। अथिरा की कहानी यह संदेश देती है कि मुश्किलें चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर आदमी हार मानने से इंकार कर दे तो मंजिल एक दिन जरूर मिलती है।




