एबीसी नेशनल न्यूज | तेल अवीव / तेहरान | 7 मार्च 2026
तेल अवीव/जेरूसलम, 7 मार्च 2026: ईरान से लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच इजरायल में लोग रोजमर्रा की जिंदगी को बचाने की कोशिश में जुटे हैं। अब युद्ध की इस स्थिति में भी एक अनोखी इनोवेशन सामने आई है – एक वेबसाइट जो बताती है कि कब नहाना सबसे सुरक्षित है, ताकि बीच में सायरन बजने पर गीले-गीले शेल्टर की तरफ भागना न पड़े। वैसे आपको यह कितना उपयोगी लगता है – प्रैक्टिकल इनोवेशन या सिर्फ मनोबल बनाए रखने का तरीका?
इस वेबसाइट का नाम है *CanIShower.com* (कैन आई शावर?), जिसे हाल ही में इजरायली डेवलपर्स ने लॉन्च किया। इसके अलावा एक और साइट *BestShowerTime.com* भी काफी पॉपुलर हो रही है। ये दोनों टूल पिछले रॉकेट अलर्ट्स के पैटर्न, होम फ्रंट कमांड (पिकुद हाओरेफ) के रियल-टाइम डेटा, आखिरी अलर्ट से कितना समय बीता, औसत गैप, 24 घंटे में कुल अलर्ट्स की संख्या और ट्रेंड (बढ़ रहे हैं या घट रहे हैं) का विश्लेषण करके रिस्क कैलकुलेट करते हैं।
उपयोगकर्ता अपनी लोकेशन चुनते हैं (जैसे जेरूसलम, तेल अवीव, नेगेव आदि), नहाने का समय बताते हैं (5 मिनट से 20 मिनट तक), और फिर प्रतिशत में रिस्क मिलता है। उदाहरण के लिए, अगर 5 मिनट का शावर लेना है तो कई जगहों पर 40% तक रिस्क दिखता है, मतलब मॉडरेट रिस्क – तैयार रहें कि बीच में रुकना पड़ सकता है। सेफेस्ट टाइम अक्सर सुबह 5:30 बजे के आसपास बताया जा रहा है, जब हमलों की फ्रीक्वेंसी सबसे कम होती है।
एक डेवलपर बेन ग्रीनबर्ग ने *Best Shower Time* बनाई, क्योंकि उनके टीनएज बच्चों वाले दोस्त शिकायत कर रहे थे कि शावर में सायरन बज जाता है। वहीं *Can I Shower?* को मैटान नाम के व्यक्ति ने बनाया। ये टूल सिर्फ नहाने तक सीमित नहीं – कुछ लोग कह रहे हैं कि इसी तरह वॉकिंग, कुकिंग या अन्य कामों के लिए भी इस्तेमाल हो सकता है।
सोशल मीडिया पर लोग इसे मजाकिया लेकिन बहुत प्रैक्टिकल बता रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “केवल इजरायल में ही कोई ऐसा ऐप बना सकता है जो रॉकेट अलर्ट के बीच सबसे सेफ शावर टाइम कैलकुलेट करे।” अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने भी इसे शेयर किया और कहा कि वो और उनकी पत्नी इसी से प्लान करते हैं, क्योंकि सिर्फ 90 सेकंड में शेल्टर पहुंचना पड़ता है।
इजरायल की ‘स्टार्टअप नेशन’ वाली स्पिरिट यहां भी दिख रही है – युद्ध के बीच भी लोग टेक्नोलॉजी से डर को मैनेज करने की कोशिश कर रहे हैं। इंटरनेट ट्रैफिक 25% बढ़ गया है, क्योंकि लोग अलर्ट ऐप्स और ऐसे टूल्स पर ज्यादा समय बिता रहे हैं।
यह खबर युद्ध की क्रूर हकीकत को दिखाती है – जहां लोग जान बचाने के साथ-साथ नहाने-खाने जैसी छोटी आजादी को भी डेटा से कंट्रोल करने लगे हैं। यह हंसाने वाला लग सकता है, लेकिन पीछे गहरा डर और अनिश्चितता है।




