एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 6 मार्च 2026
नई दिल्ली में आयोजित प्रतिष्ठित रायसीना डायलॉग के मंच से अमेरिका की ओर से आया एक बयान अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नई बहस का कारण बन गया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी और वरिष्ठ राजनयिक क्रिस्टोफर लैंडाउ ने कहा कि अमेरिका अब किसी भी देश को बिना रणनीतिक संतुलन के वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनने देने की गलती नहीं करेगा।
लैंडाउ ने कहा कि लगभग दो दशक पहले चीन के मामले में अमेरिका ने जो रणनीतिक निर्णय लिए थे, उनके परिणाम आज पूरी दुनिया देख रही है। उस समय अमेरिका ने चीन को आर्थिक और तकनीकी सहयोग देकर उसके विकास को बढ़ावा दिया, लेकिन बाद में वही चीन वैश्विक स्तर पर अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती बन गया।
उन्होंने कहा कि अमेरिका अब उस अनुभव से सबक ले चुका है और भविष्य में किसी भी देश के तेजी से उभरते आर्थिक प्रभुत्व को लेकर अधिक सतर्क रहेगा।
रायसीना डायलॉग के दौरान अपने संबोधन में लैंडाउ ने संकेत दिया कि भारत आज तेजी से उभरती हुई आर्थिक शक्ति है और वैश्विक राजनीति में उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अमेरिका भारत के उदय को बेहद सावधानी और रणनीतिक दृष्टि से देख रहा है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध बेहद मजबूत हैं और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार गहरी हो रही है। रक्षा सहयोग, उन्नत प्रौद्योगिकी, व्यापार और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझेदारी दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दे रही है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि लैंडाउ का यह बयान बदलती वैश्विक शक्ति संरचना की ओर संकेत करता है। भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, तकनीकी क्षमता और भू-राजनीतिक महत्व ने उसे विश्व राजनीति में एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में स्थापित करना शुरू कर दिया है।
रायसीना डायलॉग में दिए गए इस बयान के बाद वैश्विक रणनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले वर्षों में अमेरिका, भारत और चीन के बीच आर्थिक और सामरिक प्रतिस्पर्धा ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय कर सकती है।




