एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 2 मार्च 2026
नई दिल्ली। कांग्रेस ने ईरान के सर्वोच्च शिया धर्मगुरु अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने कहा है कि घटना के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से न तो कोई श्रद्धांजलि संदेश आया और न ही हमले की निंदा की गई। कांग्रेस ने इसे “शर्मनाक चुप्पी” करार दिया है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा, “भारत और ईरान की दोस्ती इतिहास जितनी पुरानी है।” इसके बावजूद आयतुल्लाह खामेनेई की लक्षित हत्या पर प्रधानमंत्री की ओर से एक शब्द भी न आना भारत-ईरान संबंधों के साथ विश्वासघात जैसा है। पार्टी के मुताबिक, यह स्थिति देश के नैतिक रुख पर सवाल खड़े करती है।
पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने बयान जारी करते हुए कहा, “ईरान में सर्वोच्च शिया धर्मगुरु अयातुल्लाह अली खामेनेई की इज़राएल और अमेरिका के हाथों हत्या हुए चौबीस घंटे होने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी या भारत सरकार के मुँह से एक शब्द न तो श्रद्धांजलि का निकला, न ही निंदा का।” उन्होंने पूछा कि इतने संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई।
खेड़ा ने आगे कहा कि भारत हमेशा खुद को शांति, संतुलन और नैतिक नेतृत्व का समर्थक बताता रहा है। लेकिन इस घटना पर सरकार की चुप्पी से यह छवि कमजोर होती दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा, “कहाँ गया हिंदुस्तान का नैतिक नेतृत्व? कहाँ गए हमारी सभ्यता के मूल्य?” कांग्रेस का कहना है कि जब दुनिया संकट में हो, तब भारत को स्पष्ट और मानवीय रुख अपनाना चाहिए।
कांग्रेस ने इसे विदेश नीति की कमजोरी बताते हुए कहा कि इतिहास ऐसे मौकों को दर्ज करता है। पार्टी के अनुसार, भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्थिति साफ रखनी चाहिए थी—चाहे वह श्रद्धांजलि के रूप में हो या हिंसा की निंदा के रूप में।
हालांकि केंद्र सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। विदेश नीति के जानकारों का मानना है कि भारत अक्सर पश्चिम एशिया से जुड़े मामलों में संतुलित और सावधानीपूर्ण रुख अपनाता है, ताकि उसके कूटनीतिक संबंध प्रभावित न हों।
पश्चिम एशिया में हालिया घटनाओं के बाद वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ा है। कई देशों ने प्रतिक्रिया दी है, जबकि कुछ देश हालात का आकलन करने के बाद बयान जारी कर रहे हैं। ऐसे में भारत की चुप्पी को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
अब नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर क्या आधिकारिक रुख अपनाती है और आने वाले दिनों में कोई बयान जारी करती है या नहीं। कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को आगे भी उठाती रहेगी।




