एबीसी नेशनल न्यूज | रियाद/वॉशिंगटन | 2 मार्च 2026
रियाद ने साफ और तीखे शब्दों में उन दावों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि उसने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump को Iran पर हमला करने के लिए उकसाया था। Saudi Arabia ने आधिकारिक बयान जारी कर इन रिपोर्टों को “पूरी तरह झूठा और बकवास” करार दिया और कहा कि इस तरह की खबरें उसकी घोषित विदेश नीति के बिल्कुल विपरीत हैं। सऊदी नेतृत्व ने दो टूक कहा कि उसकी प्राथमिकता क्षेत्रीय स्थिरता, संवाद और कूटनीतिक समाधान है—न कि युद्ध या टकराव को बढ़ावा देना।
विवाद तब गहराया जब अमेरिकी अख़बार The Washington Post में प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि सऊदी नेतृत्व ने ट्रंप प्रशासन से संपर्क कर ईरान के खिलाफ सख्त सैन्य कदम उठाने का आग्रह किया था। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया कि सऊदी क्राउन प्रिंस Mohammed Bin Salman ने कथित तौर पर निजी बातचीत के जरिए अमेरिका पर दबाव बनाने की कोशिश की। हालांकि रियाद ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ऐसी खबरें तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और क्षेत्र की संवेदनशील परिस्थितियों को नजरअंदाज कर पेश की गई हैं।
सऊदी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि बीते कुछ वर्षों में खाड़ी क्षेत्र में कई तरह के तनाव और राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं, लेकिन सऊदी अरब ने हमेशा कूटनीति और संवाद को प्राथमिकता दी है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि रियाद और तेहरान के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में हाल के समय में बातचीत की प्रक्रिया शुरू हुई थी। ऐसे में यह आरोप कि सऊदी अरब किसी तीसरे देश को सैन्य कार्रवाई के लिए प्रेरित कर रहा था, उसकी मौजूदा नीति और सार्वजनिक रुख से मेल नहीं खाता।
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व की राजनीति में रणनीतिक हित और कूटनीतिक बयानबाज़ी अक्सर साथ-साथ चलती हैं, जिससे बाहरी दुनिया में भ्रम की स्थिति बन जाती है। अमेरिका, सऊदी अरब और ईरान के रिश्ते दशकों से भू-राजनीतिक, धार्मिक और सामरिक समीकरणों से प्रभावित रहे हैं। ऐसे में किसी भी रिपोर्ट या लीक हुई जानकारी पर आधिकारिक स्पष्टीकरण आना असामान्य नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखाया है कि खाड़ी क्षेत्र से जुड़ी खबरें वैश्विक राजनीति, तेल बाजार और सुरक्षा समीकरणों पर सीधा असर डालती हैं। फिलहाल सऊदी अरब ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है कि उसने ट्रंप प्रशासन पर ईरान के खिलाफ हमले के लिए कोई दबाव नहीं डाला और वह क्षेत्र में स्थायी शांति और संतुलन की नीति पर कायम है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि इस मुद्दे पर अमेरिका और ईरान की ओर से कैसी प्रतिक्रिया सामने आती है, लेकिन रियाद ने अपनी स्थिति साफ शब्दों में दुनिया के सामने रख दी है।




