एबीसी नेशनल न्यूज | पेरिस | 2 मार्च 2026
France ने वेस्ट एशिया में बढ़ते सैन्य टकराव के बीच बड़ा संकेत दिया है। United States और Israel द्वारा Iran के खिलाफ जारी हमलों के बीच फ्रांस के विदेश मंत्री ने कहा है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो फ्रांस अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार है। यह बयान ऐसे समय आया है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर है और कई देशों ने अपने यहां हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। पेरिस ने साफ किया है कि क्षेत्र में मौजूद उसके नागरिकों और सामरिक हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
फ्रांस का कहना है कि उसका उद्देश्य सीधे युद्ध को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन जैसे देशों में फ्रांसीसी सैन्य सहयोग और नागरिक उपस्थिति है। ऐसे में यदि संघर्ष इन देशों तक फैलता है तो फ्रांस की प्रतिक्रिया केवल कूटनीतिक नहीं रहेगी। हालांकि अब तक औपचारिक रूप से युद्ध में शामिल होने की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन “सहयोगियों की रक्षा” वाला बयान संभावित सैन्य हस्तक्षेप की ओर इशारा करता है।
इस बीच अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के सैन्य ठिकानों, मिसाइल सिस्टम और ड्रोन लॉन्च केंद्रों पर हमले तेज कर दिए हैं। इज़रायल ने इन कार्रवाइयों को “पूर्व-निरोधक कार्रवाई” बताया है और दावा किया है कि यह कदम संभावित बड़े खतरे को रोकने के लिए उठाया गया है। अमेरिका ने भी अपने क्षेत्रीय ठिकानों और सहयोगियों की सुरक्षा का हवाला दिया है। जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए पलटवार किया है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल बन गया है। कई शहरों में सायरन बजने और हवाई हमलों की आशंका के कारण नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
युद्ध का असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका प्रभाव दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल दर्ज किया गया है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली तेल आपूर्ति पर खतरा बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता है और निवेशकों में चिंता साफ झलक रही है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो यूरोप और एशिया की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ सकता है, खासकर उन देशों पर जो तेल आयात पर निर्भर हैं।
फ्रांस ने यह भी कहा है कि पूरे घटनाक्रम को United Nations Security Council में उठाया जाना चाहिए, ताकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय एक साझा समाधान तलाश सके। पेरिस का मानना है कि बिना व्यापक वैश्विक सहमति के सैन्य कार्रवाई क्षेत्र को और अस्थिर कर सकती है। हालांकि वर्तमान हालात में कूटनीतिक समाधान की संभावना कमजोर दिखाई दे रही है, क्योंकि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं। वेस्ट एशिया का यह संघर्ष अब बहुपक्षीय स्वरूप लेता दिख रहा है। अमेरिका की सक्रिय भूमिका और फ्रांस के स्पष्ट संकेतों ने इसे एक व्यापक भू-राजनीतिक संकट में बदल दिया है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि क्या अंतरराष्ट्रीय दबाव से युद्धविराम की दिशा बनेगी या फिर यह टकराव और बड़े सैन्य संघर्ष का रूप लेगा।




