एबीसी नेशनल न्यूज | तेहरान/ नई दिल्ली | 1 मार्च 2026
ईरान की राजनीति और सैन्य ढांचे में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। ईरानी सैन्य नेतृत्व ने Islamic Revolutionary Guard Corps (आईआरजीसी) की कमान अहमद वाहिदी को सौंप दी है। यह फैसला ऐसे समय में हुआ है जब देश के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के निधन के बाद सत्ता के विभिन्न केंद्रों के बीच नए संतुलन की प्रक्रिया चल रही है। ईरान-इजरायल तनाव पहले से ही चरम पर है और पश्चिम एशिया में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। ऐसे माहौल में IRGC के नए चीफ की नियुक्ति को सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
अहमद वाहिदी का नाम ईरान की सुरक्षा और सैन्य व्यवस्था में लंबे समय से प्रभावशाली रहा है। वे इससे पहले रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और सुरक्षा मामलों में उनकी छवि एक सख्त और निर्णायक अधिकारी की रही है। उन्हें उन नेताओं में गिना जाता है जो क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने और सैन्य ताकत को मजबूत करने के पक्षधर रहे हैं। ईरान की मिसाइल क्षमता, ड्रोन कार्यक्रम और सीमापार रणनीतिक अभियानों में IRGC की केंद्रीय भूमिका रही है, और ऐसे में इस बल की कमान किसके हाथ में है, यह सीधे तौर पर देश की विदेश और रक्षा नीति की दिशा तय करता है। वाहिदी की नियुक्ति से यह संकेत मिल रहा है कि ईरान अपनी सैन्य नीति में निरंतरता और सख्ती बनाए रखना चाहता है।
खामेनेई के निधन के बाद ईरान के भीतर नेतृत्व की नई संरचना को लेकर चर्चाएं तेज हैं। सर्वोच्च नेता का पद देश की राजनीतिक, धार्मिक और सैन्य व्यवस्था का सबसे ताकतवर केंद्र माना जाता है। ऐसे में IRGC जैसे शक्तिशाली संगठन का नेतृत्व किसे दिया जाता है, यह केवल सैन्य मामला नहीं बल्कि सत्ता संतुलन का भी संकेत होता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम सेना में अनुशासन और एकजुटता बनाए रखने के लिए उठाया गया है, ताकि किसी भी आंतरिक या बाहरी चुनौती का सामना मजबूती से किया जा सके।
इधर Israel के साथ बढ़ते टकराव ने हालात और जटिल बना दिए हैं। हाल के हफ्तों में दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप, हमलों और जवाबी कार्रवाई की खबरें सामने आती रही हैं। अमेरिका की भूमिका और क्षेत्रीय शक्तियों की सक्रियता ने पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर बना दिया है। ऐसे समय में IRGC की नई कमान को यह सुनिश्चित करना होगा कि ईरान की रक्षा प्रणाली मजबूत रहे, साथ ही अंतरराष्ट्रीय दबावों का सामना भी संतुलित तरीके से किया जाए।
अहमद वाहिदी के सामने चुनौती दोहरी है—एक तरफ देश के भीतर राजनीतिक संक्रमण का दौर है, दूसरी तरफ सीमाओं के बाहर बढ़ता सैन्य तनाव। उनकी रणनीति आने वाले दिनों में यह तय करेगी कि ईरान रक्षात्मक रुख अपनाता है या क्षेत्रीय स्तर पर अपनी स्थिति और मजबूत करने के लिए आक्रामक नीति पर चलता है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि ईरान ने एक अनुभवी और प्रभावशाली सैन्य चेहरे को IRGC की कमान सौंपकर यह संदेश दिया है कि वह अस्थिर दौर में भी अपने सुरक्षा ढांचे को मजबूत रखने के लिए प्रतिबद्ध है।




