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‘ईरान को ऐसी चोट देंगे कि भूल नहीं पाएगा’, कुर्दिस्तान के US बेस पर हमले के बाद ट्रंप की चेतावनी

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एबीसी नेशनल न्यूज | वाशिंगटन/तेहरान | 1 मार्च 2026

मिडिल ईस्ट में हालात हर घंटे बदल रहे हैं और तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है। अमेरिका और इजरायल द्वारा तेहरान में किए गए संयुक्त हमलों के बाद ईरान ने खुला पलटवार शुरू कर दिया है। इजरायल के साथ-साथ सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और कुवैत की दिशा में मिसाइलें दागे जाने की खबरें सामने आई हैं। कई शहरों में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय हो गए, सायरन गूंजे और एहतियातन हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। दुबई और अबूधाबी में धमाकों और मलबा गिरने की घटनाओं से अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने अपनी उड़ानें रद्द या स्थगित कर दी हैं।

तनाव के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की मौत की पुष्टि ईरानी सरकारी मीडिया ने कर दी है। देश में 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक और सात दिनों के सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की गई है। खामेनेई की मौत के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए। ईरान के शक्तिशाली पैरामिलिट्री संगठन Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने बयान जारी कर कहा कि “इतिहास का सबसे जबरदस्त हमला” शुरू होगा और तब तक जारी रहेगा जब तक दुश्मन पीछे नहीं हटता।

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने और बड़ा हमला किया तो अमेरिका “ऐसी चोट देगा जो पहले कभी नहीं देखी गई।” ट्रंप ने यह भी कहा कि अब ईरान के साथ बातचीत आसान हो सकती है, लेकिन यदि परमाणु कार्यक्रम जारी रखा गया तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में अमेरिकी प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि ईरान ने पहले ट्रंप को निशाना बनाने की कोशिश की थी। वहीं United Nations Security Council की बैठक में संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने बढ़ते टकराव पर गहरी चिंता जताई और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की।

इजरायल की ओर से कहा गया है कि तेहरान में जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया, उनमें रक्षा और खुफिया संस्थान शामिल थे। कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में ईरान के सैन्य कमांडरों के मारे जाने की बात भी कही जा रही है। दूसरी ओर ईरान ने तेल अवीव में मिसाइल हमले का दावा किया है, जिसमें हताहतों की खबरें हैं। खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और सुरक्षा एजेंसियां चौकन्नी हैं।

भारत ने भी स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव को और न बढ़ाने तथा आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की है। मिडिल ईस्ट में रह रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा पर भी नजर रखी जा रही है।

मिसाइल हमलों, जवाबी कार्रवाई और कूटनीतिक बयानबाजी के बीच यह संघर्ष अब सीमित नहीं दिख रहा। पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या हालात कूटनीति से संभलेंगे या यह टकराव व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले लेगा।

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