एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली/तेहरान | 1 मार्च 2026
अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत की आधिकारिक पुष्टि होते ही पूरे मध्य पूर्व में हलचल मच गई है। ईरान सरकार ने 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक और 7 दिनों के सार्वजनिक अवकाश का एलान किया है। हमले के बाद अब खामेनेई का आखिरी भाषण चर्चा का केंद्र बन गया है, जिसमें उन्होंने ईरानी जनता को संबोधित करते हुए अमेरिका और उसके नेतृत्व पर तीखा हमला बोला था। अपने अंतिम सार्वजनिक संबोधन में खामेनेई ने कहा था कि ईरान ने अपने “इस्लामी और शिया सबक” अच्छी तरह सीख लिए हैं और देश को पता है कि उसे किस दिशा में आगे बढ़ना है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए इमाम हुसैन का जिक्र किया और कहा कि “मेरे जैसा कोई भी यजीद के आगे नहीं झुकेगा।” इस बयान को उस समय ईरान की प्रतिरोध नीति और पश्चिमी दबाव के खिलाफ सख्त संदेश के तौर पर देखा गया था।
खामेनेई ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा था कि ईरान जैसा देश, जिसकी अपनी सभ्यता, इतिहास और ऊंची शिक्षाएं हैं, वह “भ्रष्ट नेताओं” के सामने कभी नहीं झुकेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सीधा इशारा अमेरिकी नेतृत्व की ओर था। हमले से ठीक पहले दिया गया यह भाषण अब उनके समर्थकों के लिए भावनात्मक और प्रतीकात्मक संदेश बन गया है।
खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे और लगभग चार दशकों तक उन्होंने देश की नीतियों पर अंतिम निर्णय का अधिकार रखा। उनके नेतृत्व में ईरान ने क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई, वहीं अमेरिका और इजरायल के साथ तनाव लगातार बना रहा। 28 फरवरी को शुरू हुए हवाई हमलों के एक दिन बाद उनकी मौत की खबर सामने आई। सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया, जिसके बाद ईरान के सरकारी मीडिया ने आधिकारिक पुष्टि की।
तेहरान सहित कई शहरों में शोक सभाएं हो रही हैं। सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और इंटरनेट पर निगरानी बढ़ा दी गई है। वहीं, क्षेत्रीय हालात अब भी तनावपूर्ण हैं। अमेरिका और इजरायल की ओर से हमले जारी रहने की बात कही गई है, जबकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई का संकेत दिया है।
खामेनेई के 36 से अधिक वर्षों के शासन का अंत ऐसे समय में हुआ है, जब ईरान पहले से आर्थिक दबाव, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और आंतरिक विरोध प्रदर्शनों से जूझ रहा था। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि आगे ईरान की सत्ता किसके हाथ में जाएगी और क्या यह टकराव व्यापक युद्ध का रूप लेगा। फिलहाल, उनका आखिरी भाषण ही उनके राजनीतिक जीवन का अंतिम सार्वजनिक संदेश बन गया है, जिसे समर्थक “डटकर खड़े रहने” की अपील के रूप में देख रहे हैं।




