एबीसी नेशनल न्यूज | 28 फरवरी 2026 | दोपहर अपडेट
मिडिल ईस्ट का संघर्ष अब खुलकर क्षेत्रीय रूप लेता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद, बहरीन की राजधानी मनामा, कुवैत सिटी, कतर की राजधानी दोहा, संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी और दुबई सहित कम से कम सात देशों में धमाकों, मिसाइल गतिविधियों और एयर डिफेंस सिस्टम की सक्रियता की पुष्टि हुई है। कई शहरों में आसमान में इंटरसेप्टर मिसाइलों की चमक देखी गई और रात भर सायरन गूंजते रहे। अभी तक बड़े पैमाने पर नागरिक हताहतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हालात बेहद तनावपूर्ण हैं।
रियाद में हुए धमाकों को अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। प्रिंस सुल्तान एयर बेस, जहां अमेरिकी रक्षा संसाधन मौजूद हैं, संभावित लक्ष्य माना जा रहा है। सऊदी नेतृत्व ने हमलों की कड़ी निंदा की है और सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च स्तर पर रखा है। विस्तृत जानकारी सीमित है, लेकिन राजधानी में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
यूएई में अल धफरा एयर बेस के आसपास मिसाइल गतिविधि दर्ज की गई। कुछ मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया गया, जबकि गिरते मलबे से नुकसान और एक व्यक्ति की मौत की सूचना है। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय के पास धुएं के गुबार देखे गए। कतर के अल उदैद एयर बेस और कुवैत के अल सलेम एयर बेस के ऊपर एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय रहे। जॉर्डन में भी मिसाइल गतिविधि की रिपोर्ट सामने आई है, जिससे संघर्ष का दायरा और बढ़ता दिख रहा है।
यह सब उस सैन्य अभियान के बाद हुआ, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने “मेजर कॉम्बैट ऑपरेशंस” शुरू करने की घोषणा की थी। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की मिसाइल और परमाणु क्षमता को रोकने के लिए की गई है। इज़राइल ने इसे पूर्व-नियोजित रक्षात्मक कदम बताया। दूसरी ओर, ईरान ने इन हमलों को आक्रामक कार्रवाई बताते हुए “निर्णायक जवाब” देने की चेतावनी दी और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिकी तथा इज़राइली हितों को पूरे क्षेत्र में वैध लक्ष्य घोषित किया है।
खाड़ी देशों में हवाई क्षेत्र बंद या सीमित किए जाने से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ा है। कई एयरलाइंस ने अपनी सेवाएं रद्द या डायवर्ट कर दी हैं। तेल आपूर्ति को लेकर वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ रही है, क्योंकि यह क्षेत्र विश्व ऊर्जा आपूर्ति का अहम केंद्र है। किसी भी बड़े व्यवधान से अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी आ सकती है।
खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक कार्यरत हैं, खासकर यूएई, सऊदी अरब और कुवैत में। अभी तक भारतीय समुदाय को सीधे प्रभावित करने वाली किसी बड़ी घटना की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन दूतावासों द्वारा सतर्कता सलाह जारी किए जाने की संभावना है। ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने भी अपने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।
विश्लेषकों का मानना है कि संघर्ष अब सीमित सैन्य कार्रवाई से आगे बढ़ चुका है और यदि कूटनीतिक प्रयास तुरंत सफल नहीं होते, तो यह व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है। आने वाले घंटे और दिन बेहद अहम होंगे। पूरी दुनिया की नजर अब इस पर है कि क्या तनाव कम होगा या मिडिल ईस्ट एक बड़े और लंबे संघर्ष की ओर बढ़ेगा।




