एबीसी नेशनल न्यूज | इस्लामाबाद/काबुल | 27 फरवरी 2026
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव ने खतरनाक मोड़ ले लिया है। पाकिस्तान ने काबुल और कंधार समेत अफगानिस्तान के कई शहरों में तालिबान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं, जिन्हें 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के बीच सबसे बड़ी सैन्य बढ़ोतरी माना जा रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Muhammad Asif ने हालात को “ओपन वॉर” करार देते हुए संकेत दिया कि संघर्ष अब खुले टकराव में बदल सकता है।
रिपोर्टों के मुताबिक गुरुवार रात और शुक्रवार तड़के पाकिस्तान एयर फोर्स ने “ऑपरेशन घज़ब लिल हक” के तहत हमले किए। इन हमलों में काबुल, कंधार, पक्तिया और सीमावर्ती क्षेत्रों में तालिबान के सैन्य कार्यालय, मुख्यालय, गोला-बारूद डिपो और लॉजिस्टिक बेस को निशाना बनाया गया। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने दावा किया कि 22 ठिकानों पर सटीक एयर-टू-ग्राउंड मिसाइल हमले किए गए, जिनमें सैकड़ों तालिबान लड़ाके मारे गए और कई घायल हुए। पाकिस्तान ने कहा कि कार्रवाई अफगानिस्तान से होने वाले हमलों के जवाब में की गई और नागरिकों को नुकसान से बचाने की कोशिश की गई।
दूसरी ओर तालिबान के प्रवक्ता Zabihullah Mujahid ने पाकिस्तान के दावों को खारिज करते हुए कहा कि काबुल, कंधार, पक्तिया, पक्तिका, खोस्त और लगमान में हमले हुए हैं और इसके जवाब में तालिबान ने पाकिस्तान के अंदर सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। तालिबान ने दावा किया कि उनके ड्रोन हमलों और जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तानी सैनिक मारे गए तथा कुछ सैन्य पोस्ट पर कब्जा किया गया। दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
संघर्ष की जड़ 2,600 किलोमीटर लंबी विवादित सीमा और बढ़ते आतंकी हमलों को लेकर लंबे समय से चल रहा तनाव है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान तालिबान तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और इस्लामिक स्टेट खोरासान जैसे संगठनों को शरण दे रहा है, जो पाकिस्तान में हमले कर रहे हैं। हाल के महीनों में सीमा पर गोलीबारी और छिटपुट हमलों की घटनाएं बढ़ी थीं, लेकिन काबुल और कंधार जैसे बड़े शहरों पर हमले ने स्थिति को गंभीर बना दिया है।
काबुल के पश्चिमी इलाके में एक हथियार डिपो पर हमले के बाद कई घंटों तक विस्फोटों की आवाजें सुनाई देती रहीं, जिससे शहर में दहशत फैल गई। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान की कार्रवाई को जवाबी हमला बताते हुए बातचीत के जरिए समाधान निकालने की इच्छा जताई है, जबकि पाकिस्तान ने सुरक्षा चिंताओं को प्राथमिक कारण बताया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम दोनों देशों के संबंधों में गहरी दरार को दर्शाता है। कभी पाकिस्तान को तालिबान का समर्थक माना जाता था, लेकिन मौजूदा हालात में दोनों के बीच अविश्वास और टकराव खुलकर सामने आ गया है। फिलहाल क्षेत्र में तनाव बरकरार है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर स्थिति के आगे के घटनाक्रम पर टिकी हुई है।




