एबीसी नेशनल न्यूज | चेन्नई | 27 फरवरी 2026
तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला जब पूर्व मुख्यमंत्री O. Panneerselvam (OPS) ने AIADMK से अलग होने के बाद आज द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) का दामन थाम लिया। चेन्नई स्थित पार्टी मुख्यालय अन्ना अरिवलयम में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री M. K. Stalin, उपमुख्यमंत्री Udhayanidhi Stalin और कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में उन्होंने सदस्यता ग्रहण की। 75 वर्षीय पन्नीरसेल्वम तीन बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और दिवंगत नेता J. Jayalalithaa के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते थे।
जयललिता के निधन के बाद पार्टी में नेतृत्व संघर्ष के दौरान उनकी टकराव की स्थिति Edappadi K. Palaniswami (EPS) से हुई, जिसके बाद 2022 में उन्हें AIADMK से निष्कासित कर दिया गया था।
DMK में शामिल होने के बाद OPS के प्रमुख बयान
OPS ने कहा कि वे एम.के. स्टालिन के नेतृत्व को स्वीकार करते हैं और राज्य में बेहतर शासन के लिए DMK के साथ काम करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि EPS दक्षिण तमिलनाडु से किसी नेता को उभरने नहीं देना चाहते, जबकि द्रविड़ आंदोलन को मजबूत करने का काम DMK कर रही है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे पार्टी में किसी पद की अपेक्षा के बिना एक कार्यकर्ता के रूप में शामिल हुए हैं और DMK को “थाई कझगम” (मां पार्टी) बताया।
चुनाव से पहले सियासी समीकरणों में बदलाव
यह फैसला अप्रैल–मई में संभावित 2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आया है। OPS का Thevar समुदाय और दक्षिणी जिलों, खासकर थेनी क्षेत्र में प्रभाव माना जाता है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि 2021 में जीती उनकी बोदिनायक्कनूर सीट से उन्हें फिर मौका मिल सकता है।
OPS के साथ उनके बेटे P. Ravindranath Kumar के भी DMK में शामिल होने से इस कदम को और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
AIADMK के लिए झटका, DMK के लिए रणनीतिक बढ़त
विश्लेषकों के अनुसार यह AIADMK के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि OPS पहले से ही अलग शक्ति केंद्र के रूप में उभर रहे थे। हाल में EPS द्वारा T. T. V. Dhinakaran को NDA खेमे में लाने के बाद OPS की वापसी की संभावनाएं लगभग खत्म हो गई थीं।
राजनीतिक जानकार इसे DMK की रणनीतिक चाल मान रहे हैं, जिसका उद्देश्य द्रविड़ वोट बैंक को एकजुट करना और विपक्ष को कमजोर करना है। जयललिता के करीबी माने जाने वाले नेता का प्रतिद्वंद्वी खेमे में जाना राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि OPS की एंट्री 2026 के विधानसभा चुनाव में तमिलनाडु के सियासी समीकरणों को कितना प्रभावित करती है।




