Home » National » पतंजलि का एडवेंचर टूरिज्म प्रोजेक्ट विवादों में, करोड़ों का निवेश फंस गया, सरकारी जमीन पर कब्जे का खेल?

पतंजलि का एडवेंचर टूरिज्म प्रोजेक्ट विवादों में, करोड़ों का निवेश फंस गया, सरकारी जमीन पर कब्जे का खेल?

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली/हरिद्वार | 27 फरवरी 2026

उत्तराखंड सरकार ने बालकृष्ण की कंपनी को दी जमीन – यूपी बोला: ये हमारी है!

हरिद्वार का बैरागी कैंप क्षेत्र अब उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच नया युद्धक्षेत्र बन गया है। उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड (UTDB) ने जून 2023 में आचार्य बालकृष्ण की कंपनी राजस एयरो स्पोर्ट्स एंड एडवेंचर प्राइवेट लिमिटेड को एक साल के पायलट प्रोजेक्ट के नाम पर बड़ी जमीन सौंप दी – लेकिन अब यूपी सिंचाई विभाग चिल्ला रहा है: “ये जमीन हमारी है! कुंभ मेले के लिए आरक्षित क्षेत्र है, बिना अनुमति कोई निर्माण अवैध!”

दरअसल, 2023 में UTDB ने कंपनी को बैरागी कैंप में करीब 1200 मीटर × 200 मीटर (लगभग 142 एकड़ बताई जा रही कुछ रिपोर्ट्स में) जमीन दी थी। प्लान था – 1 किलोमीटर लंबी एयरस्ट्रिप बनानी, जायरोकॉप्टर, हॉट एयर बैलून से एडवेंचर टूरिज्म शुरू करना। कंपनी ने जर्मनी से जायरोकॉप्टर, स्पेन से हॉट एयर बैलून मंगाए, हैंगर बनाया – दावा है 8 करोड़ से ज्यादा का निवेश किया। लेकिन प्रोजेक्ट की अवधि जून 2024 में खत्म हो गई, जमीन वापस नहीं सौंपी गई। UTDB के अतिरिक्त CEO अश्विनी पुंडीर ने सितंबर 2024 में पत्र लिखकर लताड़ लगाई: “जमीन वापस नहीं की, 10% लाभांश नहीं दिया, पर्यटकों की लिस्ट नहीं भेजी – अब क्या इंतजार?”

अब असली धमाका – सितंबर 2024 में यूपी सिंचाई विभाग ने पत्र ठोक दिया: “ये जमीन हमारी सीमा में आती है। 2021 के UP-उत्तराखंड मुख्यमंत्रियों के समझौते के मुताबिक हरिद्वार का ये इलाका यूपी का है, सिर्फ मेला अनुमतियां अस्थायी रूप से उत्तराखंड के पास। बिना NOC के कोई काम नहीं!” यूपी ने टेंडर रद्द करने की मांग की, निर्माण को अवैध बताया।

कंपनी का पलटवार: “हमने अवैध कब्जा नहीं किया। UTDB का लेटर ऑफ अवार्ड मिला था, तभी निवेश किया। स्थिति स्पष्ट होते ही इंफ्रास्ट्रक्चर हटा लेंगे – लेकिन DGCA की परमिशन चाहिए जायरोकॉप्टर शिफ्ट करने के लिए।” लेकिन सवाल उठ रहे हैं – क्या उत्तराखंड सरकार ने ऐसी जमीन दी जिसकी वो मालिक ही नहीं थी? क्या ये सिर्फ एडवेंचर टूरिज्म का बहाना था, या बालकृष्ण-पतंजलि को फायदा पहुंचाने का खेल?

पिछले साल सितंबर से ही विवाद गर्म है, लेकिन अब 2026 में भी कोई हल नहीं। UTDB ने NOC मिलने तक टेंडर रद्द रखने को कहा, लेकिन कंपनी जमीन नहीं छोड़ रही। उत्तराखंड टूरिज्म सचिव धीरज गर्बियाल और अधिकारी सीमा नौटियाल से संपर्क हुआ, लेकिन कोई जवाब नहीं।

बड़ा सवाल – कौन जिम्मेदार?

– उत्तराखंड सरकार ने बिना पूरी जांच के जमीन क्यों सौंपी?
– यूपी का दावा सही है तो करोड़ों का निवेश कहां जाएगा?
– क्या ये पतंजलि को फायदा पहुंचाने का एक और तरीका था, जैसे पहले जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट में 30,000 करोड़ की जमीन 1 करोड़ सालाना में देने के आरोप लगे थे?

जनता पूछ रही है – राज्य सरकारें आपस में लड़ रही हैं, लेकिन आम आदमी की जमीन पर खेल कौन खेल रहा है? कुंभ का इलाका, सिंचाई विभाग की जमीन – यहां एयरस्ट्रिप बनाना कितना सही?

एबीसी नेशनल न्यूज ने दोनों पक्षों से बात करने की कोशिश की। उत्तराखंड सरकार चुप, यूपी आक्रामक। कंपनी इंतजार में। लेकिन सच सामने आएगा – चाहे कितना भी समय लगे। ये सिर्फ जमीन का विवाद नहीं, दो राज्यों के बीच मालिकाना हक और पतंजलि के नाम पर राजनीतिक संरक्षण का मामला है।

5 1 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments