एबीसी नेशनल न्यूज | लखनऊ | 23 फरवरी 2026
लखनऊ विश्वविद्यालय में सामने आई एक घटना ने यह संदेश दिया कि भारत की असली पहचान विविधता में एकता और इंसानियत में विश्वास है। प्रशासन द्वारा परिसर स्थित नमाज़ स्थल को बंद किए जाने के बाद मुस्लिम छात्रों ने खुले स्थान पर नमाज़ अदा की, जबकि उनके हिंदू साथियों ने चारों ओर मानव शृंखला बनाकर सुरक्षा और एकजुटता का परिचय दिया। नमाज़ के दौरान बना यह सुरक्षा घेरा केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं था, बल्कि आपसी भरोसे, दोस्ती और साझी संस्कृति की जीवंत तस्वीर बन गया, जिसने कैंपस से लेकर सोशल मीडिया तक लोगों का ध्यान खींचा।
घटना का सबसे भावनात्मक क्षण तब सामने आया जब रोज़ा इफ्तार का समय हुआ और हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों के छात्र एक साथ बैठे, रोज़ा खोला और साझा इफ्तार किया। नमाज़ की सुरक्षा से लेकर इफ्तार की साझेदारी तक का यह सिलसिला उस गंगा-जमुनी तहज़ीब को जीवंत करता दिखा जिसमें आस्था से पहले इंसानियत और रिश्तों को महत्व दिया जाता है। छात्रों ने बताया कि यह पहल पूरी तरह स्वतःस्फूर्त थी और इसका उद्देश्य केवल इतना था कि किसी भी छात्र को अपनी धार्मिक आस्था निभाने में भय या असहजता महसूस न हो।
प्रशासन ने बहाना बनाया था कि ढांचे की जर्जर स्थिति और संभावित खतरे को देखते हुए बैरिकेडिंग की थी। हालांकि सबको पता है कि ये सारी कवायद इसलिए की गई थी कि मुस्लिम छात्र नमाज नहीं पढ़ पाएं। लेकिन छात्रों ने संवाद, संयम और आपसी सहयोग से पूरे माहौल को शांतिपूर्ण बनाए रखा। विभिन्न छात्र संगठनों और साथियों के सहयोग से परिसर में सौहार्द कायम रहा और किसी प्रकार का तनाव पैदा नहीं हुआ। शिक्षकों और सामाजिक पर्यवेक्षकों ने इस पहल को सकारात्मक नागरिकता, संवेदनशीलता और लोकतांत्रिक सहअस्तित्व का उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे कदम समाज में विश्वास और संवाद की संस्कृति को मजबूत करते हैं।
घटना के बाद छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह दृश्य नफरत और विभाजन की सोच के खिलाफ युवाओं का सबसे मजबूत और शांतिपूर्ण जवाब है। छात्रों ने स्पष्ट किया कि कैंपस की दोस्ती और इंसानियत किसी भी राजनीतिक या वैचारिक मतभेद से ऊपर है और नई पीढ़ी नफरत नहीं बल्कि संवाद, सम्मान और साझेदारी की राह चुनना चाहती है। साझा इफ्तार में शामिल छात्रों ने भी कहा कि एक-दूसरे की धार्मिक परंपराओं में भागीदारी से दूरी नहीं बल्कि अपनापन बढ़ता है और यही माहौल किसी भी संभावित तनाव को खत्म करने की सबसे प्रभावी ताकत बनता है।
लखनऊ विश्वविद्यालय की यह घटना अंततः एक बड़े सामाजिक संदेश के रूप में सामने आई—जब युवा एक-दूसरे के साथ खड़े होते हैं तो नफरत की जगह एकता की जीत होती है। नमाज़ की सुरक्षा से साझा इफ्तार तक का यह दृश्य भारत की उस खूबसूरती को सामने लाता है, जहां अलग-अलग पहचान होने के बावजूद दिल एक साथ धड़कते हैं। छात्रों के इस जज्बे ने यही संदेश दिया कि नफरत को जीतने नहीं देना है और भाईचारा, सम्मान तथा शांति ही समाज की सबसे बड़ी ताकत है।




