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कश्मीर बयान पर उमर अब्दुल्ला का शहबाज शरीफ को करारा जवाब

एबीसी नेशनल न्यूज | पटना | 7 फरवरी 2026

शहबाज शरीफ के बयान से भड़की सियासत

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कश्मीर से जुड़े बयान पर बुधवार को बेहद तीखा और सख्त रुख अपनाया है। शहबाज शरीफ ने हाल ही में कश्मीर को लेकर बयान देते हुए जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान की “शरीयान” यानी जीवन-रेखा बताया था, जिसे भारत में न सिर्फ आपत्तिजनक बल्कि भड़काऊ बयान के तौर पर देखा जा रहा है। इसी बयान के बाद उमर अब्दुल्ला ने कड़ा पलटवार करते हुए पाकिस्तान को पहले अपने हालात पर ध्यान देने की नसीहत दी।

“जो उनके पास है, उसे भी नहीं संभाल पा रहे”

उमर अब्दुल्ला ने शहबाज शरीफ की टिप्पणी को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि “पाकिस्तान वह चीज़ संभाल नहीं पा रहा है जो पहले से उसके पास है, ऐसे में वह हमारे बारे में बात करने की स्थिति में नहीं है।” उन्होंने कहा कि पाकिस्तान खुद गंभीर आर्थिक, राजनीतिक और आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे हालात में उसे भारत-पाकिस्तान के संवेदनशील मुद्दों, खासकर कश्मीर पर बयानबाज़ी करने के बजाय अपने देश में स्थिरता और शांति स्थापित करने पर ध्यान देना चाहिए।

जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा

उमर अब्दुल्ला ने दो टूक शब्दों में यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और हमेशा रहेगा। उन्होंने साफ किया कि पाकिस्तान को इस मुद्दे पर किसी तरह का अधिकार जताने या टिप्पणी करने का कोई नैतिक या कानूनी आधार नहीं है। उनके मुताबिक कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की बयानबाज़ी सिर्फ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ध्यान खींचने की कोशिश भर है, जिसका ज़मीनी सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है।

बयान से भारत-पाकिस्तान बहस और तेज

इस तीखी प्रतिक्रिया के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे को लेकर बयानबाज़ी और तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उमर अब्दुल्ला का यह बयान पाकिस्तान की आक्रामक भाषा के जवाब में भारत की ओर से एक सख्त राजनीतिक संदेश है। वर्षों से चले आ रहे कश्मीर विवाद के बीच इस तरह के बयान दोनों देशों के बीच तनाव को और गहरा करते नजर आ रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असर की आशंका

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत-पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं और प्रभावशाली राजनेताओं के ऐसे बयान कश्मीर मुद्दे को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला सकते हैं। हालांकि, उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपने रुख को लेकर पूरी तरह स्पष्ट और अडिग है तथा किसी भी बाहरी दबाव या उकसावे वाली बयानबाज़ी से अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा।

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