एबीसी नेशनल न्यूज | 31 जनवरी 2026
लखनऊ/प्रयागराज। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य Swami Avimukteshwaranand Saraswati के तीखे बयानों से उत्तर प्रदेश की राजनीति और धार्मिक माहौल में उबाल आ गया है। उन्होंने न सिर्फ “असली और नकली हिंदू” की पहचान की बात कही, बल्कि खुलकर कहा कि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जैसे समझदार व्यक्ति को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनना चाहिए। साथ ही उन्होंने योगी सरकार को अपनी मांगें मानने के लिए 40 दिनों का अल्टीमेटम दिया है।
यह विवाद प्रयागराज के माघ मेला 2026 के दौरान शुरू हुआ, जब शंकराचार्य ने संगम स्नान में बाधा, प्रमाण पत्र मांगे जाने और अपने पद के अपमान का आरोप लगाया। इसके बाद मामला सिर्फ धार्मिक नहीं रहा, बल्कि सीधे राजनीतिक टकराव में बदल गया।
शंकराचार्य का सीधा संदेश
वाराणसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शंकराचार्य ने कहा कि हिंदू होना केवल भाषण, नारे या भगवा पहनने से तय नहीं होता, बल्कि कर्म और आचरण से तय होता है। उन्होंने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं—
गौ माता को राज्य माता का दर्जा दिया जाए,
बीफ और मांस निर्यात पर रोक लगे,
गौ संरक्षण को लेकर ठोस और दिखने वाले कदम उठाए जाएं।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 40 दिनों के भीतर इन मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सरकार को “नकली हिंदू” घोषित करेंगे और 11 मार्च को लखनऊ में संतों के साथ बड़ा आंदोलन करेंगे।
केशव मौर्य की खुली तारीफ, योगी पर अप्रत्यक्ष निशाना
शंकराचार्य ने उपमुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya की तारीफ करते हुए कहा कि वे समझदार हैं, सरकार और पार्टी के नुकसान को समझते हैं और ऐसे व्यक्ति को ही मुख्यमंत्री बनना चाहिए। इसे मौजूदा मुख्यमंत्री Yogi Adityanath पर सीधा नहीं तो अप्रत्यक्ष हमला माना जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में इस बयान को बीजेपी के भीतर संभावित मतभेदों के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। विपक्ष ने इसे सरकार की हिंदुत्व नीति और आंतरिक खींचतान पर बड़ा सवाल बताया है।
धार्मिक–राजनीतिक असर
शंकराचार्य के बयानों के बाद संत समाज और धार्मिक संगठनों में भी मतभेद सामने आ गए हैं। कुछ संगठन उनके समर्थन में खड़े हैं, तो कुछ सरकार के साथ हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यह मुद्दा अब सिर्फ आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई ध्रुवीकरण रेखा खींच रहा है।
अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम और आने वाले 40 दिनों पर है। यही तय करेगा कि यह विवाद थमता है या राज्य की राजनीति में एक बड़े टकराव की शक्ल लेता है।




