एबीसी नेशनल न्यूज | 30 जनवरी 2026
नई दिल्ली। कांग्रेस ने आर्थिक सर्वेक्षण को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने कहा कि यह रिपोर्ट सरकार के खोखले दावों की पोल खोलती है और देश की अर्थव्यवस्था की जमीनी सच्चाई को सामने लाती है। कांग्रेस के अनुसार, जहां सरकार तेज़ विकास के दावे कर रही है, वहीं हकीकत में आर्थिक रफ्तार धीमी पड़ रही है और आम आदमी पर महंगाई, बेरोज़गारी व बढ़ती असमानता का बोझ लगातार बढ़ रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण स्वयं यह स्वीकार करता है कि वित्त वर्ष 2027 में जीडीपी वृद्धि दर घटकर 6.3 से 6.8 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि यह साफ़ संकेत है कि अर्थव्यवस्था स्थिरता की ओर नहीं, बल्कि बढ़ती अनिश्चितता की ओर बढ़ रही है। निजी निवेश कमजोर है, रोजगार सृजन ठप पड़ा है और रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है।
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब सेवा क्षेत्र के निर्यात और प्रवासी भारतीयों से आने वाले धन (रेमिटेंस) में वृद्धि हो रही है, तो इसके बावजूद रुपये की स्थिति कमजोर क्यों बनी हुई है। पार्टी का आरोप है कि सरकार की आर्थिक नीतियाँ आम जनता के बजाय केवल चुनिंदा बड़े कॉरपोरेट घरानों के हितों को प्राथमिकता दे रही हैं, जबकि किसान, युवा, मध्यम वर्ग और छोटे कारोबारी गंभीर संकट से जूझ रहे हैं।
पार्टी ने शिक्षा, कृषि और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं में कटौती को भी देश के भविष्य के लिए घातक बताया। कांग्रेस के अनुसार, कक्षा 10 के बाद छात्रों का घटता नामांकन, कृषि उत्पादन का वैश्विक औसत से नीचे रहना और रोजगार योजनाओं का सीमित प्रभाव सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कांग्रेस ने मांग की कि केंद्र सरकार आत्ममंथन करे, आंकड़ों की बाज़ीगरी छोड़कर ज़मीनी हकीकत को स्वीकार करे और ऐसी आर्थिक नीतियाँ लागू करे जो केवल विकास दर नहीं, बल्कि रोजगार सृजन, सामाजिक न्याय और आम आदमी की आय बढ़ाने पर केंद्रित हों।




