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शेयर बाजार महंगा, जोखिम बढ़ा: मुख्य आर्थिक सलाहकार की चेतावनी

एबीसी नेशनल न्यूज | 30 जनवरी 2026

नई दिल्ली। देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने शेयर बाजार को लेकर निवेशकों को सावधान रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि पिछले कई सालों से दुनिया में पैसा बहुत सस्ते में मिलता रहा और ब्याज दरें कम रहीं। इसका नतीजा यह हुआ कि शेयर, प्रॉपर्टी और दूसरी चीज़ों के दाम जरूरत से ज्यादा बढ़ गए। उन्होंने समझाया कि जब पैसा आसानी से मिलता है, तो लोग ज्यादा जोखिम लेते हैं। इससे बाजार की कीमतें असली कीमत से ऊपर चली जाती हैं। आज की स्थिति में शेयर बाजार काफी महंगा हो चुका है, इसलिए आगे चलकर गिरावट का खतरा भी बढ़ गया है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि 2008 के बाद ‘ईजी मनी’ यानी आसान पैसे का दौर चला। इसका असर यह पड़ा कि 2022-23 में महंगाई बढ़ी और शेयर बाजार की वैल्यूएशन बहुत ऊपर पहुंच गई। हालात कुछ वैसे ही बन गए हैं, जैसे साल 2000 में टेक बबल फूटने से पहले थे।

कुछ बड़ी कंपनियों पर टिका बाजार

नागेश्वरन के मुताबिक, आज बाजार कुछ गिनी-चुनी बड़ी कंपनियों के सहारे चल रहा है। अगर इनमें से किसी कंपनी में झटका लगता है, तो पूरे बाजार पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, अब पैसा बैंकों के बजाय ऐसे स्रोतों से आ रहा है, जिन पर कड़ी निगरानी कम होती है। इससे जोखिम और बढ़ जाता है।

AI शेयरों से आई तेजी, खतरा भी बढ़ा

सर्वे में बताया गया कि हाल के वर्षों में बाजार की तेजी का बड़ा कारण AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियां हैं। इन शेयरों में तेज उछाल आया है, लेकिन इससे अचानक बड़ी गिरावट का खतरा भी बना हुआ है।

सोना-चांदी की चमक भी चिंता का संकेत

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि सोना और चांदी के दामों में तेजी सिर्फ जियो-पॉलिटिकल तनाव की वजह से नहीं है। लोग डॉलर और यूरो जैसी फिएट करेंसी की कीमत को लेकर भी चिंतित हैं, इसलिए सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर जा रहे हैं।

अनिश्चितता से पूरी अर्थव्यवस्था पर असर

सर्वे में चेतावनी दी गई है कि अगर बाजार में लंबे समय तक अनिश्चितता रही, तो निवेश और कर्ज पर बुरा असर पड़ेगा। कंपनियां फैसले टालेंगी, निवेश घटेगा और आगे चलकर वित्तीय संकट का खतरा बढ़ सकता है।

इसीलिए सुझाव दिया गया है कि भारत को लंबे समय के कैपिटल मार्केट को मजबूत करना चाहिए, ताकि सिर्फ बैंकों पर निर्भरता कम हो। साथ ही, डेट इंस्ट्रूमेंट्स के टैक्स नियमों में बदलाव की जरूरत बताई गई है, ताकि निवेश का संतुलन बना रहे। बाजार में तेजी के बीच आंख मूंदकर निवेश करने के बजाय समझदारी और सावधानी से कदम उठाना जरूरी है।

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