महेंद्र कुमार | नई दिल्ली 19 जनवरी 2026
नई दिल्ली। नई दिल्ली में पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की के साथ विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अहम बैठक की। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों को और मजबूती देने में अहम कदम मानी जा रही है। सौहार्दपूर्ण माहौल में बैठक रही और दोनों नेताओं ने खुले मन से एक-दूसरे के साथ विचार मंथन किया। पोलैंड के विदेश मंत्री सिकोरस्की ने भी भारत को एक भरोसेमंद और तेज़ी से आगे बढ़ने वाला साझेदार बताया और भविष्य में सहयोग को और विस्तार देने की इच्छा जताई। दोनों देश अपने रिश्तों को एक मजबूत और भरोसेमंद साझेदारी में बदलना चाहते हैं। इस दौरान पुराने और मित्रतापूर्ण संबंधों की चर्चा हुई। डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत और पोलैंड के रिश्ते काफी पुराने हैं और समय के साथ ये और गहरे हुए हैं। उन्होंने बताया कि अब यह रिश्ता सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं है, व्यापार, निवेश, शिक्षा, तकनीक और रक्षा जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
बातचीत के दौरान व्यापार और आर्थिक सहयोग पर विशेष ज़ोर दिया गया। दोनों नेताओं ने माना कि भारत और पोलैंड के बीच व्यापार तेज़ी से बढ़ रहा है और इसमें अभी और संभावनाएँ हैं। डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारतीय कंपनियाँ पोलैंड में निवेश कर रही हैं और इससे वहाँ रोज़गार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, वहीं पोलैंड की कंपनियाँ भी भारत के विशाल बाज़ार में रुचि दिखा रही हैं। दोनों पक्षों ने साफ कहा कि आने वाले समय में व्यापार को और सरल और व्यापक बनाया जाएगा ताकि आम लोगों को भी इसका सीधा लाभ मिल सके।
सुरक्षा और वैश्विक शांति से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। डॉ. जयशंकर ने आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और कहा कि दुनिया के किसी भी हिस्से में आतंकवाद को बढ़ावा देना पूरे मानव समाज के लिए खतरा है। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद के प्रति “शून्य सहनशीलता” की नीति ही एकमात्र रास्ता है। पोलैंड के विदेश मंत्री ने भी इस बात से सहमति जताई और कहा कि शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद जरूरी है।
बैठक में यह भी साफ हुआ कि दोनों देश केवल अपने फायदे की नहीं, बल्कि वैश्विक भलाई की सोच रखते हैं। जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल तकनीक और शिक्षा जैसे विषयों पर भी दोनों नेताओं ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने माना कि आज की दुनिया में चुनौतियाँ साझा हैं, इसलिए समाधान भी मिलकर ही निकाले जाने चाहिए। इस सोच ने बैठक को केवल औपचारिक नहीं, बल्कि वास्तव में सार्थक बना दिया।




