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WATCH VIDEO — ‘धन्यवाद मोदी जी’ एशिया की सबसे कमजोर करेंसी रुपया को बनाने के लिए : सुप्रिया श्रीनेत

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एबीसी नेशनल न्यूज | 14 जनवरी 2026

नई दिल्ली। कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये की गिरती हालत को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “धन्यवाद मोदी जी, एक और ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए”—और इस ‘उपलब्धि’ का मतलब है कि 2025 में भारतीय रुपया एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गया है। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि यह कोई छोटी बात नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर आम आदमी की ज़िंदगी, उसकी जेब और उसके भविष्य पर पड़ रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता ने आंकड़ों के साथ सरकार को घेरा और कहा कि 2025 में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 6.03 प्रतिशत तक कमजोर हुआ, जबकि कई अन्य एशियाई मुद्राएं मजबूत हुईं। पहली बार ऐसा हुआ है जब रुपया ₹90 प्रति डॉलर का स्तर पार कर गया, जो अपने आप में गंभीर चेतावनी है। उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि चीनी युआन डॉलर के मुकाबले 3.42 प्रतिशत मजबूत हुआ, जबकि भारत की अर्थव्यवस्था उलटी दिशा में जाती दिख रही है। उनके मुताबिक यह अंतर बताता है कि समस्या वैश्विक नहीं, बल्कि भारत की अपनी आर्थिक नीतियों की है।

सुप्रिया श्रीनेत ने यह भी कहा कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने रुपये को संभालने के लिए 45 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च कर दिए, फिर भी रुपया लगातार फिसलता रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतना बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार झोंकने के बाद भी रुपया नहीं संभल पाया, तो साफ है कि सरकार की आर्थिक रणनीति कहीं न कहीं बुरी तरह नाकाम हुई है। उनका कहना था कि यह सिर्फ बाजार का उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि नीति स्तर की असफलता है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने आम जनता पर पड़ने वाले असर को आसान शब्दों में समझाते हुए कहा कि कमजोर रुपया सीधे महंगाई बढ़ाता है। जब रुपया गिरता है तो तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोना और दूसरी जरूरी चीजों का इंपोर्ट महंगा हो जाता है। इसका मतलब है कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते हैं, रोज़मर्रा का राशन महंगा होता है और EMI का बोझ भी बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि इसका सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर पड़ता है, जिनकी पहले से ही आमदनी सीमित है और खर्च लगातार बढ़ रहा है।

सरकार की सफाई पर हमला बोलते हुए सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि हर बार की तरह अब भी यह कहा जा रहा है कि “डॉलर मजबूत हो रहा है” या “वैश्विक चुनौतियाँ हैं”, लेकिन ये तर्क फिजूल और गुमराह करने वाले हैं। अगर सिर्फ वैश्विक वजहें होतीं, तो बाकी एशियाई मुद्राएं इतनी बुरी तरह क्यों नहीं गिर रहीं? उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि भारत की अर्थव्यवस्था अंदर से कमजोर की गई है।

उन्होंने रुपये की कमजोरी के पीछे कई कारण गिनाए। उनके मुताबिक मोदी सरकार की खराब आर्थिक नीतियाँ, अमेरिका के ऊंचे टैरिफ, और सबसे अहम फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) का भारत से लगातार पैसा निकालना—ये सभी संकेत हैं कि निवेशकों का भरोसा डगमगा रहा है। जब विदेशी निवेशक पैसा निकालते हैं, तो रुपये पर सीधा दबाव पड़ता है और इसका नुकसान देश की जनता को भुगतना पड़ता है।

सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि यह केवल आंकड़ों की लड़ाई नहीं… रोटी, कपड़ा, मकान और रोज़मर्रा की ज़िंदगी की लड़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जश्न और प्रचार में व्यस्त है, जबकि देश का रुपया गिर रहा है और आम आदमी की क्रय शक्ति कमजोर होती जा रही है। कांग्रेस का कहना है कि अगर समय रहते आर्थिक नीतियों को नहीं सुधारा गया, तो इसका खामियाजा आने वाले सालों में देश को और भी भारी रूप में भुगतना पड़ेगा।

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