[the_ad id="179"]
Home » National » “बीजेपी छोड़ने के ऐलान के 48 घंटे में राजकुमार मालवीय के ठिकानों पर ACB छापा” — कार्रवाई की टाइमिंग पर सियासी बवाल

“बीजेपी छोड़ने के ऐलान के 48 घंटे में राजकुमार मालवीय के ठिकानों पर ACB छापा” — कार्रवाई की टाइमिंग पर सियासी बवाल

अखलाक अहमद | 14 जनवरी 2026

जयपुर/बांसवाड़ा | राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई को लेकर सियासत गरमा गई है। बीजेपी छोड़ने के ऐलान के महज़ 48 घंटे के भीतर बांसवाड़ा में राजकुमार मालवीय और उनके परिवार से जुड़े ठिकानों पर ACB की छापेमारी ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। अख़बार में प्रकाशित खबर के मुताबिक, दो पेट्रोल पंप और एक क्रशर प्लांट के दस्तावेज़ खंगाले गए, साथ ही ज़मीन, लाइसेंस, टेंडर और लेन-देन से जुड़े काग़ज़ात की गहन जांच की गई। कार्रवाई की “टाइमिंग” को लेकर ही सबसे ज़्यादा सवाल उठ रहे हैं।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस कार्रवाई को सीधे तौर पर राजनीतिक साज़िश बताया है। उन्होंने कहा कि जब किसी राजनीतिक फैसले के तुरंत बाद जांच एजेंसियां सक्रिय हो जाएं, तो यह भ्रष्टाचार के खिलाफ ईमानदार कार्रवाई नहीं, बल्कि सत्ता के दबाव में की गई कार्रवाई प्रतीत होती है। डोटासरा ने आरोप लगाया कि पहले ED, फिर CBI और अब ACB—जांच एजेंसियों को एक के बाद एक राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।

फोटो में छपी खबर के अनुसार, ACB की टीम ने राजकुमार मालवीय से जुड़े पेट्रोल पंपों और क्रशर प्लांट पर पहुंचकर दस्तावेज़ों की जांच की, कर्मचारियों से पूछताछ की और आय–व्यय से संबंधित रिकॉर्ड खंगाले। विपक्ष का कहना है कि अगर जांच निष्पक्ष होती, तो उसका समय राजनीतिक घटनाक्रम से मेल नहीं खाता। यही वजह है कि इस कार्रवाई को बीजेपी छोड़ने के ऐलान से जोड़कर देखा जा रहा है।

डोटासरा ने राजस्थान के DGP से अपील करते हुए कहा कि राजस्थान पुलिस और जांच एजेंसियों की साख बचाई जाए। उनका कहना है कि “इतना खुला खेल मत खेलिए कि खेल खुद ही बेनकाब हो जाए,” क्योंकि आज ACB की हर कार्रवाई पर जनता सवाल खड़े कर रही है। विपक्ष का दावा है कि चयनात्मक कार्रवाई से लोकतंत्र कमजोर होता है और कानून व्यवस्था पर भरोसा डगमगाता है। ACB या राज्य सरकार की ओर से इन राजनीतिक आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन “बीजेपी छोड़ने के 48 घंटे में राजकुमार मालवीय के ठिकानों पर छापा” अब इस पूरे मामले की सबसे बड़ी पहचान बन चुका है, जिसने जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता और राजनीतिक दखल को लेकर बहस को और तेज़ कर दिया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *