Home » National » देशभर में गहरी होती वायु प्रदूषण की समस्या, सरकार की तैयारी नाकाफी: जयराम रमेश

देशभर में गहरी होती वायु प्रदूषण की समस्या, सरकार की तैयारी नाकाफी: जयराम रमेश

नई दिल्ली | 11 जनवरी 2026

देश में हवा की हालत लगातार खराब होती जा रही है और यह समस्या अब सिर्फ सर्दियों या कुछ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही। सेंटर फ़ॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की नई रिपोर्ट बताती है कि वायु प्रदूषण पूरे भारत में एक गंभीर और स्थायी संकट बन चुका है। इस रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस के महासचिव (संचार) और सांसद जयराम रमेश ने मोदी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकार की प्रतिक्रिया इस बड़े जनस्वास्थ्य संकट के मुकाबले कमज़ोर और नाकाफी है।

जयराम रमेश ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार देश के करीब 44 प्रतिशत शहरी इलाके, यानी लगभग 4,000 से ज्यादा शहर, ऐसी हवा में सांस ले रहे हैं जो सेहत के लिए खतरनाक है। इनमें से 1,787 शहरों में हवा में मौजूद बारीक ज़हरीले कण (PM2.5) तय सीमा से ज्यादा पाए गए हैं। पिछले पांच सालों के आंकड़े बताते हैं कि इन शहरों में हालात सुधरने के बजाय लगातार खराब बने हुए हैं। इसका सीधा असर आम आदमी, बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमार लोगों की सेहत पर पड़ रहा है।

कांग्रेस नेता ने सरकार के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार इस योजना को बड़े नाम के साथ पेश कर रही है, लेकिन हकीकत यह है कि यह ज़मीन पर असर दिखाने में नाकाम रही है। देश में जहां करीब 1,800 शहर गंभीर रूप से प्रदूषण से जूझ रहे हैं, वहीं NCAP के तहत सिर्फ 130 शहरों को ही शामिल किया गया है। इनमें से भी केवल 28 शहरों में सही ढंग से हवा की निगरानी हो रही है। जयराम रमेश ने कहा कि यह दिखाता है कि सरकार ने समस्या की गंभीरता को अब तक ठीक से समझा ही नहीं है।

ALSO READ  WATCH VIDEO -- नफरत पर एकता भारी: नमाज़ की हिफाज़त से साझा इफ्तार तक, लखनऊ यूनिवर्सिटी में दिखी भारत की असली खूबसूरती

उन्होंने यह भी बताया कि भारत में वायु गुणवत्ता के जो मानक तय किए गए हैं, वे खुद ही कमजोर हैं। भारत में PM2.5 के लिए जो सीमा तय है, वह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सिफारिशों से कई गुना ज्यादा है। जयराम रमेश ने सवाल किया कि जब मानक ही ढीले होंगे, तो लोगों की सेहत की सही सुरक्षा कैसे हो पाएगी।

जयराम रमेश ने सरकार से मांग की कि NCAP को सिर्फ एक योजना न रखकर कानूनी ताकत दी जाए, ताकि नियमों का सही ढंग से पालन हो सके। उन्होंने कहा कि इस योजना के लिए जो पैसा दिया जा रहा है, वह भी बहुत कम है। मौजूदा बजट जरूरत से कई गुना कम है। कांग्रेस का कहना है कि इस कार्यक्रम को कम से कम 25,000 करोड़ रुपये का बनाया जाना चाहिए और इसे देश के सबसे ज्यादा प्रदूषित 1,000 शहरों और कस्बों तक फैलाया जाना चाहिए।

अपने बयान में उन्होंने साफ कहा कि जब तक कोयला आधारित बिजली संयंत्रों, वाहनों के धुएं और उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषण पर सख्ती नहीं होगी, तब तक हालात नहीं सुधरेंगे। उन्होंने मांग की कि सभी कोयला बिजली संयंत्रों में तय समय के भीतर प्रदूषण कम करने वाले सिस्टम लगाए जाएं और पर्यावरण की निगरानी करने वाली संस्थाओं को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाए।

अंत में जयराम रमेश ने कहा कि सरकार ने संसद में भी इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा से बचने की कोशिश की है। उनका कहना है कि अगर वायु प्रदूषण को अब भी गंभीरता से नहीं लिया गया, तो इसका नुकसान आने वाले समय में देश की सेहत, अर्थव्यवस्था और अगली पीढ़ियों को झेलना पड़ेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *