Home » Religion » मीनाक्षी मंदिर में 17 साल बाद ‘कुंभाभिषेकम’ की भव्य तैयारी, हीरे के मुकुट से होगा देवी का शृंगार

मीनाक्षी मंदिर में 17 साल बाद ‘कुंभाभिषेकम’ की भव्य तैयारी, हीरे के मुकुट से होगा देवी का शृंगार

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

एबीसी नेशनल न्यूज 11 जनवरी 2026

तमिलनाडु के मदुरै स्थित विश्व प्रसिद्ध मीनाक्षी अम्मन मंदिर में 17 साल बाद होने जा रहे ‘कुंभाभिषेकम’ को लेकर भव्य तैयारियां जोरों पर हैं। पूरे मंदिर परिसर को रोशनी से सजाया जा रहा है और शहर में उत्सव जैसा माहौल बन चुका है। यह ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन पहले इसी महीने होना था, लेकिन अब इसे फरवरी में आयोजित किया जाएगा। मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है।
मीनाक्षी मंदिर का कुंभाभिषेकम एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है, जो परंपरागत रूप से हर 12 साल में एक बार होता है। वर्ष 2009 के बाद अगला कुंभाभिषेकम 2021 में प्रस्तावित था, लेकिन 2018 में मंदिर परिसर में लगी आग और उसके बाद व्यापक मरम्मत कार्य के चलते इसे टाल दिया गया। लंबे समय तक चले जीर्णोद्धार और संरचनात्मक मजबूती के कार्यों के बाद अब यह आयोजन 17 वर्षों के अंतराल पर होने जा रहा है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है।

हीरे के मुकुट से होगा देवी मीनाक्षी का विशेष शृंगार

कुंभाभिषेकम समारोह की शुरुआत देवी मीनाक्षी के विशेष शृंगार से होगी। इस अवसर पर देवी को ‘डायमंड क्राउन’ यानी हीरे का मुकुट पहनाया जाएगा, जिसे देखने के लिए लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवी मीनाक्षी को माता पार्वती का अवतार माना जाता है और कुंभाभिषेकम के दौरान किया जाने वाला यह विशेष शृंगार अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके बाद पारंपरिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मंदिर शिखरों पर पवित्र जल का अभिषेक किया जाएगा।

भव्य जुलूस और प्लोट्टू फेस्टिवल का आयोजन

कुंभाभिषेकम के बाद मंदिर परिसर और मदुरै शहर में भव्य धार्मिक जुलूस निकाले जाएंगे। प्लोट्टू फेस्टिवल (तप्पम) के साथ देवी मीनाक्षी और भगवान सुंदरेश्वर की भव्य शोभायात्रा शहर की सड़कों से गुजरेगी। इस दौरान पारंपरिक संगीत, नृत्य और लोक कलाओं का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। मंदिर प्रशासन का अनुमान है कि इस पूरे आयोजन के दौरान करीब 10 लाख श्रद्धालु मदुरै पहुंच सकते हैं, जिनमें देश-विदेश से आने वाले भक्त भी शामिल होंगे।

12वीं सदी का स्थापत्य चमत्कार, 30 हजार मूर्तियों से सुसज्जित मंदिर

मीनाक्षी अम्मन मंदिर का इतिहास करीब 12वीं सदी से जुड़ा हुआ है। यह मंदिर अपनी अद्भुत द्रविड़ स्थापत्य शैली के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। मंदिर परिसर में मौजूद गोपुरम (प्रवेश द्वार) पर करीब 30 हजार से अधिक मूर्तियां उकेरी गई हैं, जो देवी-देवताओं, पौराणिक कथाओं और सांस्कृतिक प्रतीकों को दर्शाती हैं। खास बात यह है कि इन मूर्तियों को सदियों से दोबारा नहीं बनाया गया है, बल्कि संरक्षण और मरम्मत के ज़रिये उनकी मूल संरचना को सुरक्षित रखा गया है।

श्रद्धा, संस्कृति और परंपरा का संगम

17 साल बाद होने जा रहा यह कुंभाभिषेकम न सिर्फ एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह तमिल संस्कृति, आस्था और परंपरा का भव्य संगम भी है। मीनाक्षी मंदिर का यह उत्सव एक बार फिर मदुरै को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में दुनिया के सामने स्थापित करेगा। श्रद्धालुओं का मानना है कि कुंभाभिषेकम के दर्शन से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है, और इसी आस्था के साथ लाखों भक्त इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनने को तैयार हैं।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments