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JNU में मोदी–शाह के खिलाफ नारेबाज़ी, FIR दर्ज; 30–35 छात्रों की पहचान का दावा

सुमन कुमार | नई दिल्ली 9 जनवरी 2026

दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर राजनीतिक नारों और विवाद के केंद्र में आ गया है। विश्वविद्यालय परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारे लगाए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद JNU प्रशासन की ओर से FIR दर्ज कराई गई है, जिससे परिसर में सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज़ हो गई है। JNU के मुख्य सुरक्षा अधिकारी (Chief Security Officer) ने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा है कि नारेबाज़ी की इस घटना में शामिल 30 से 35 छात्रों की पहचान कर ली गई है। शिकायत के मुताबिक, यह नारेबाज़ी एक समूह द्वारा की गई, जिसने विश्वविद्यालय परिसर में कानून-व्यवस्था और शांति भंग करने की कोशिश की। सुरक्षा अधिकारी ने यह भी कहा कि CCTV फुटेज और अन्य उपलब्ध सबूतों के आधार पर छात्रों की पहचान की गई है।

प्रशासन का कहना है कि विश्वविद्यालय एक शैक्षणिक संस्थान है और यहां अभिव्यक्ति की आज़ादी के साथ-साथ नियमों और कानूनों का पालन भी ज़रूरी है। अगर कोई गतिविधि कानून के दायरे से बाहर जाती है या सार्वजनिक शांति को प्रभावित करती है, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। इसी आधार पर पुलिस में FIR दर्ज कराई गई है और मामले की जांच शुरू हो चुकी है।

वहीं, छात्र राजनीति से जुड़े कुछ संगठनों का कहना है कि JNU हमेशा से विचार-विमर्श और असहमति की आवाज़ का केंद्र रहा है। उनका तर्क है कि नारेबाज़ी को लेकर सीधे आपराधिक मामला दर्ज करना छात्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करता है। हालांकि, प्रशासन और पुलिस का रुख साफ है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह देखा जा रहा है कि नारेबाज़ी किस संदर्भ में हुई, किसने आयोजन किया और क्या इसमें किसी तरह का उकसावा या नियमों का उल्लंघन हुआ। इस घटना ने एक बार फिर JNU में राजनीति, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रशासनिक सख्ती के बीच चल रहे टकराव को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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