एबीसी न्यूज 9 जनवरी 2026
भारत बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। सरकार और समाज मिलकर यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि हर बच्चे को शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित बचपन का अधिकार मिले। इसी लक्ष्य के तहत नवंबर 2024 में एक राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की गई, जिसने अब देशभर में एक जन-आंदोलन का रूप ले लिया है।
इस अभियान को और ज़मीनी स्तर तक प्रभावी बनाने के लिए दिसंबर 2025 से मार्च 2026 तक 100 दिनों का विशेष सघन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान गांव-गांव, पंचायतों, स्कूलों, आंगनबाड़ियों और समुदायों में लोगों को बाल विवाह के कानूनी, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों के बारे में बताया जा रहा है। लाखों लोग शपथ, सामुदायिक बैठकों और जनभागीदारी के ज़रिये इस मुहिम से जुड़ चुके हैं, जिससे समाज में सोच बदलने की प्रक्रिया तेज़ हुई है।
इस प्रयास के ठोस नतीजे भी सामने आने लगे हैं। छत्तीसगढ़ का बालोद जिला वर्ष 2025 में देश का पहला “बाल विवाह मुक्त जिला” घोषित किया गया, जो पूरे देश के लिए एक मिसाल बन गया है। वहीं, छत्तीसगढ़ के ही सूरजपुर जिले की 75 पंचायतों को बाल विवाह मुक्त घोषित किया गया है। यह उपलब्धि दिखाती है कि जब प्रशासन, स्थानीय निकाय और समाज एकजुट होते हैं, तो दशकों पुरानी कुप्रथा को भी समाप्त किया जा सकता है।
सरकार ने निगरानी और त्वरित कार्रवाई को मज़बूत करने के लिए एक और अहम कदम उठाया है। देशभर में चाइल्ड मैरिज प्रोहिबिशन ऑफिसर्स (CMPOs) के लिए एक डेडिकेटेड ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया है। इस पोर्टल के ज़रिये बाल विवाह की घटनाओं की रियल-टाइम रिपोर्टिंग, ट्रैकिंग और कार्रवाई संभव हो सकेगी। इससे न केवल समय रहते बाल विवाह को रोका जा सकेगा, बल्कि जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाल विवाह को रोकना सिर्फ कानून का सवाल नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक चेतना का मुद्दा है। कम उम्र में शादी बच्चों—खासतौर पर बच्चियों—की पढ़ाई, सेहत और आत्मनिर्भरता को गंभीर नुकसान पहुंचाती है। मौजूदा अभियान का फोकस यही है कि परिवारों को यह समझाया जाए कि शिक्षित और स्वस्थ बच्चा ही मजबूत भारत की नींव है।
कुल मिलाकर, भारत की यह मुहिम एक साफ संदेश देती है कि देश अब बाल विवाह के प्रति किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। सरकार, प्रशासन और समाज की साझा कोशिशों से वह दिन दूर नहीं जब बाल विवाह इतिहास की किताबों तक सीमित रह जाएगा, और हर बच्चा अपने सपनों के साथ सुरक्षित, शिक्षित और सशक्त भविष्य की ओर बढ़ेगा।




