Home » National » भारत की वैश्विक हैसियत गिर गई : कृति आज़ाद

भारत की वैश्विक हैसियत गिर गई : कृति आज़ाद

एबीसी डेस्क 5 जनवरी 2026

अमेरिका–वेनेज़ुएला घटनाक्रम पर भारत की आधिकारिक चुप्पी को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद कृति आज़ाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेहद तीखा और सीधा हमला बोलते हुए भारत की विदेश नीति और वैश्विक भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए अपने पोस्ट में कृति आज़ाद ने कहा कि जिस प्रधानमंत्री को उनके समर्थक कभी इतना “शक्तिशाली” बताते थे कि उन्होंने रूस–यूक्रेन युद्ध तक रुकवा दिया, वही प्रधानमंत्री आज अमेरिका–वेनेज़ुएला संकट जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर एक शब्द भी बोलने की स्थिति में नहीं हैं। यह टिप्पणी विपक्ष की उस चिंता को सामने लाती है, जिसमें भारत की वैश्विक आवाज़ के कमजोर पड़ने का आरोप लगाया जा रहा है।

कृति आज़ाद ने अपने पोस्ट में यह भी लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस पूरे घटनाक्रम पर चुप रहना ही बेहतर समझा, जबकि दुनिया के कई देश अमेरिका की कार्रवाई और उसके निहितार्थों पर खुलकर राय रख रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भारत अब इतना कमजोर हो गया है कि वह एक संप्रभु देश पर अमेरिका द्वारा कथित सैन्य हस्तक्षेप और नियंत्रण जैसे कदमों पर भी अपनी स्पष्ट राय नहीं रख सकता। उनके अनुसार, यह चुप्पी केवल कूटनीतिक रणनीति नहीं, बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय हैसियत में आई गिरावट का संकेत है।

तृणमूल कांग्रेस सांसद ने आगे आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की वह छवि, जो कभी गुटनिरपेक्षता, स्वतंत्र विदेश नीति और नैतिक नेतृत्व के लिए जानी जाती थी, अब धुंधली होती जा रही है। कृति आज़ाद का कहना है कि आज भारत उस स्थिति में पहुंच गया है जहां वह बड़े वैश्विक टकरावों पर केवल मूकदर्शक बना हुआ है। उन्होंने अपने पोस्ट में साफ शब्दों में लिखा कि प्रधानमंत्री के शासनकाल में भारत की वैश्विक स्थिति इतनी कमजोर हो गई है कि आज भारत के पास न तो स्पष्ट मत है और न ही नैतिक साहस।

अपने बयान के अंत में कृति आज़ाद ने बेहद भावनात्मक और कटाक्षपूर्ण शब्दों का इस्तेमाल करते हुए लिखा—“What a fall”, और टूटे दिल (💔) का इमोजी लगाया। यह पंक्ति सीधे तौर पर प्रधानमंत्री की कथित गिरती अंतरराष्ट्रीय साख की ओर इशारा करती है। सोशल मीडिया पर यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है और विपक्षी समर्थक इसे भारत की विदेश नीति पर गंभीर चेतावनी बता रहे हैं, जबकि सत्तारूढ़ दल के समर्थक इसे राजनीतिक हमला करार दे रहे हैं।

इस पूरे मामले पर अभी तक प्रधानमंत्री कार्यालय या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस बयान को हल्के में नहीं लिया जा रहा। जानकारों का मानना है कि US–वेनेज़ुएला संकट और उस पर भारत की चुप्पी आने वाले दिनों में संसद और मीडिया दोनों में बहस का बड़ा मुद्दा बन सकती है। विपक्ष इसे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के क्षरण के रूप में देख रहा है, जबकि सरकार की ओर से अक्सर ऐसी स्थितियों में “कूटनीतिक संतुलन” और “रणनीतिक चुप्पी” को नीति का हिस्सा बताया जाता रहा है।

फिलहाल, कृति आज़ाद का यह बयान न केवल प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि 2026 की राजनीति में भारत की वैश्विक भूमिका और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर रुख एक बड़ा सियासी मुद्दा बनने जा रहा है। US–वेनेज़ुएला संकट के बहाने शुरू हुई यह बहस आने वाले समय में और तेज होने के आसार दिखा रही है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments