अंतरराष्ट्रीय डेस्क 30 दिसंबर 2025
आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) आज बच्चों और किशोरों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है। पढ़ाई से लेकर खेल, सोशल मीडिया, चैटबॉट और डिजिटल मनोरंजन तक—हर जगह AI मौजूद है। लेकिन चीन सरकार का मानना है कि तकनीक की यह तेज़ रफ्तार तरक़्क़ी अगर बिना नियंत्रण के चली, तो यह बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए ख़तरनाक साबित हो सकती है। इसी चिंता को देखते हुए चीन अब AI को लेकर ऐसे नियम बनाने की योजना पर काम कर रहा है, जिनका मुख्य उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा और आत्महत्या जैसे संवेदनशील जोखिमों को रोकना है।
चीन के नीति-निर्माताओं का कहना है कि कुछ AI सिस्टम और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अनजाने में बच्चों को नकारात्मक सोच की ओर धकेल सकते हैं। लगातार स्क्रीन पर समय बिताना, अकेलापन, भावनात्मक सहारे की कमी और कभी-कभी AI की तरफ़ से मिलने वाले असंवेदनशील जवाब बच्चों के मन पर गहरा असर डालते हैं। सरकार को चिंता है कि अगर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो तकनीक मददगार बनने के बजाय बच्चों की मानसिक स्थिति को और कमजोर कर सकती है। इसलिए AI को केवल स्मार्ट नहीं, बल्कि संवेदनशील और ज़िम्मेदार बनाने की ज़रूरत बताई जा रही है।
प्रस्तावित नियमों में आत्महत्या और खुद को नुकसान पहुँचाने से जुड़े ख़तरों पर विशेष ज़ोर दिया गया है। चीन चाहता है कि AI प्लेटफॉर्म ऐसा कोई कंटेंट न दिखाएँ और न ही ऐसी बातचीत करें, जिससे बच्चों में निराशा, हताशा या आत्मघाती विचार पैदा हों। अगर कोई बच्चा या किशोर उदासी, डर या मानसिक तनाव की बात करता है, तो AI सिस्टम को इस तरह तैयार किया जाएगा कि वह सहानुभूति भरे, सकारात्मक और सहायक जवाब दे सके। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि AI किसी भी हालत में बच्चे को अकेला या बेकार महसूस न कराए।
चीन की योजना के अनुसार बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले AI टूल्स और ऐप्स पर अलग और सख़्त मानक लागू किए जाएंगे। उम्र के हिसाब से कंटेंट, हिंसक या डरावने विषयों से दूरी, और भावनात्मक रूप से सुरक्षित बातचीत को अनिवार्य बनाया जा सकता है। इसके साथ ही माता-पिता और अभिभावकों को निगरानी और नियंत्रण के अधिक अधिकार देने की भी बात सामने आई है, ताकि वे जान सकें कि बच्चे किस तरह के डिजिटल माहौल में समय बिता रहे हैं। सरकार का मानना है कि बच्चों की डिजिटल दुनिया पारदर्शी और सुरक्षित होनी चाहिए।
इन नियमों से टेक्नोलॉजी कंपनियों की ज़िम्मेदारी भी काफी बढ़ जाएगी। AI बनाने और चलाने वाली कंपनियों को यह साबित करना होगा कि उनके प्लेटफॉर्म बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित हैं और समाज पर नकारात्मक असर नहीं डालते। चीन साफ़ संकेत दे रहा है कि सिर्फ़ तकनीकी तरक़्क़ी या मुनाफ़ा ही प्राथमिकता नहीं है, बल्कि इंसानी ज़िंदगी और बच्चों का भविष्य सबसे ऊपर है। नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर सख़्त कार्रवाई भी की जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह कदम पूरी दुनिया के लिए एक अहम संकेत है। जैसे-जैसे AI बच्चों की ज़िंदगी में गहराई से प्रवेश कर रहा है, वैसे-वैसे यह सवाल भी ज़रूरी हो जाता है कि तकनीक किस दिशा में जा रही है। क्या वह बच्चों को समझदार, आत्मविश्वासी और सुरक्षित बना रही है, या अनजाने में उन्हें मानसिक दबाव में डाल रही है? चीन की यह पहल इस बहस को वैश्विक स्तर पर और तेज़ कर सकती है।
कुल मिलाकर, चीन के प्रस्तावित AI नियम यह संदेश देते हैं कि तकनीक का असली मकसद इंसान की मदद करना होना चाहिए, न कि उसे नुकसान पहुँचाना। बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को केंद्र में रखकर बनाई गई यह नीति दिखाती है कि भविष्य की तकनीक वही होगी, जो इंसानियत के साथ आगे बढ़े।




