एबीसी डेस्क 30 दिसंबर 2025
संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक पल सामने आया है। पहली बार संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने अपना नववर्ष 2026 का आधिकारिक संदेश हिंदी भाषा में जारी किया। यह कदम न सिर्फ भाषा के स्तर पर, बल्कि भारत और हिंदी भाषी दुनिया के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह नववर्ष संदेश सिर्फ शब्दों का अनुवाद नहीं, वैश्विक संवाद में हिंदी की ऐतिहासिक एंट्री के रूप में देखा जा रहा है। अपने संदेश में गुतारेस ने कहा कि जब दुनिया एक नए वर्ष में प्रवेश कर रही है, तब वैश्विक हालात कई चुनौतियों से घिरे हुए हैं। असमानता, हिंसा, जलवायु संकट और युद्ध जैसे मुद्दों ने मानवता के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि दुनिया आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां नेताओं को सिर्फ सुनना ही नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई भी करनी होगी।
महासचिव ने चिंता जताई कि वैश्विक सैन्य खर्च लगातार बढ़ रहा है और यह विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे जरूरी क्षेत्रों से कई गुना अधिक हो चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शांति बनाए रखने का रास्ता हथियारों की होड़ नहीं, बल्कि लोगों में निवेश और संवाद से होकर गुजरता है।
अपने संदेश में गुतारेस ने 2026 के लिए स्पष्ट अपील की—
नेताओं से आग्रह किया कि वे टकराव की बजाय समाधान, डर की बजाय मानवता, और सत्ता की बजाय पृथ्वी व आम आदमी को प्राथमिकता दें। साथ ही उन्होंने आम लोगों से भी कहा कि वे अपनी भूमिका निभाएं, क्योंकि भविष्य केवल फैसलों से नहीं, बल्कि सामूहिक साहस और जिम्मेदारी से बनता है।
हिंदी में यह संदेश जारी होना भारत के उस लंबे प्रयास का परिणाम माना जा रहा है, जिसके तहत संयुक्त राष्ट्र में हिंदी की स्वीकार्यता और प्रभाव बढ़ाने की लगातार मांग की जाती रही है। यह पहल न केवल हिंदी भाषा को वैश्विक मंच पर सम्मान देती है, बल्कि यह भी संदेश देती है कि संयुक्त राष्ट्र अब दुनिया की विविध भाषाओं और संस्कृतियों को और गहराई से अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।




