एबीसी डेस्क 26 दिसंबर 2025
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर बड़ा और संवेदनशील फैसला सामने आया है। चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि SIR की तय समय-सीमा को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही राज्य में करीब 2.89 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इस कदम से प्रदेश की राजनीति ही नहीं, आम लोगों के जीवन पर भी सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, करीब 1.11 करोड़ मतदाताओं को नोटिस भेजे जाएंगे, जिनके नामों को लेकर संदेह या आपत्ति दर्ज की गई है। इन वोटरों को तय समय के भीतर अपनी नागरिकता, पहचान और पते से जुड़े दस्तावेज़ प्रस्तुत करने होंगे। अगर समय पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं।
चुनाव आयोग का तर्क है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए जरूरी है। आयोग का कहना है कि मृत, स्थानांतरित या दोहरी प्रविष्टियों वाले नामों को हटाना लोकतंत्र की मजबूती के लिए अनिवार्य है। लेकिन जमीनी हकीकत यह भी है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने की आशंका ने लाखों परिवारों में चिंता और असमंजस पैदा कर दिया है।
ग्रामीण इलाकों, शहरी गरीब बस्तियों, प्रवासी मजदूरों और हाशिये पर खड़े समुदायों को लेकर खास चिंता जताई जा रही है। सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों का कहना है कि दस्तावेज़ों की कमी, जागरूकता का अभाव और सीमित समय-सीमा के कारण कई पात्र मतदाता भी वोट देने के अधिकार से वंचित हो सकते हैं। उनका आरोप है कि यह प्रक्रिया अगर संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ नहीं चलाई गई, तो लोकतांत्रिक अधिकारों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से दावा किया जा रहा है कि हर नोटिस का जवाब देने का पूरा मौका दिया जाएगा और किसी का नाम बिना उचित प्रक्रिया के नहीं हटेगा। लेकिन ज़मीनी स्तर पर यह देखना अहम होगा कि क्या सच में आम आदमी तक सूचना समय पर पहुंचती है और क्या उसे अपनी बात रखने का वास्तविक अवसर मिलता है।
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और विविधता वाले राज्य में मतदाता सूची से करोड़ों नाम हटने की यह प्रक्रिया सिर्फ एक प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि लोकतंत्र की सेहत से जुड़ा बड़ा सवाल बन गई है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि SIR की यह कवायद पारदर्शिता और न्याय के साथ पूरी होती है या फिर लाखों आवाज़ें चुपचाप मतदाता सूची से बाहर कर दी जाती हैं।




