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अंकिता भंडारी हत्याकांड पर नया दावा…. क्या दुष्यंत गौतम थे रहस्यमयी VIP?

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एबीसी डेस्क 23 दिसंबर 2025

उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया है। इस बार मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी उर्मिला राठौर के बयानों ने पुराने जख्मों को फिर से हरा कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों में उर्मिला राठौर ने कहा है कि अंकिता मामले में जिस “VIP” का नाम शुरू से रहस्य बना रहा, वह कोई और नहीं बीजेपी का राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड का तत्कालीन प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम था। इस दावे के सामने आते ही विपक्ष ने सरकार और बीजेपी नेतृत्व को कठघरे में खड़ा करना शुरू कर दिया है।

इन दावों के अनुसार, सुरेश राठौर का कहना है कि जिस रिज़ॉर्ट (वनंत्रा रिज़ॉर्ट) में अंकिता भंडारी काम करती थी, उसी होटल में हत्या की रात दुष्यंत कुमार गौतम की मौजूदगी बताई जा रही है। आरोप यह भी लगाया गया है कि अंकिता पर कथित तौर पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डाला जा रहा था, जिसका उसने विरोध किया। हालांकि, यह बात साफ तौर पर समझना जरूरी है कि ये आरोप और बयान राजनीतिक और व्यक्तिगत स्तर पर सामने आए दावे हैं, जिनकी अब तक किसी जांच एजेंसी या अदालत ने पुष्टि नहीं की है।

तथ्यों की बात करें तो अंकिता भंडारी, पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर क्षेत्र स्थित वनंत्रा रिज़ॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थी। सितंबर 2022 में उसकी हत्या कर दी गई, और इस मामले में रिज़ॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य—जो बीजेपी नेता विनोद आर्य का बेटा है—समेत दो अन्य कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया। जांच के दौरान यह सामने आया था कि अंकिता पर “VIP मेहमानों” को विशेष सेवाएं देने का दबाव था, जिसे लेकर उसने अपनी एक दोस्त के साथ व्हाट्सऐप चैट में डर और तनाव जाहिर किया था। यही “VIP” शब्द बाद में पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बन गया।

अंकिता की हत्या के बाद प्रदेश में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला था। सरकार और प्रशासन पर सवाल उठे थे, खासकर तब जब आरोपियों के रिज़ॉर्ट पर बुलडोज़र चलाया गया, जिसे कई लोगों ने सबूत मिटाने की कोशिश के तौर पर देखा। मामला बाद में एसआईटी और फिर कोर्ट ट्रायल तक पहुंचा, जो अभी भी जारी है। लेकिन “VIP कौन था?”—यह सवाल आज भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है।

अब उर्मिला राठौर के ताज़ा दावों ने इस पुराने सवाल को फिर से जिंदा कर दिया है। विपक्षी दलों का कहना है कि अगर इस तरह के आरोप सामने आ रहे हैं, तो सरकार को राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करनी चाहिए। वहीं, बीजेपी की ओर से इन नए आरोपों पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे मामलों में आरोप-प्रत्यारोप से ज्यादा ज़रूरी है कि तथ्यों के आधार पर सच्चाई सामने आए। एक युवा लड़की की हत्या सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, समाज और सत्ता की संवेदनशीलता की भी कसौटी है। अब देखना होगा कि ये नए दावे जांच एजेंसियों और अदालत के सामने किस हद तक टिकते हैं, और क्या अंकिता भंडारी को अंततः पूरा न्याय मिल पाता है या नहीं।

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