सुमन कुमार | नई दिल्ली 21 दिसंबर 2025
2007 के अजमेर दरगाह बम धमाके से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बहुत अहम और उम्मीद जगाने वाला फैसला सुनाया है। इस फैसले से उन पीड़ित परिवारों को नई राहत मिली है, जो सालों से इंसाफ का इंतज़ार कर रहे थे।
दरअसल, इस मामले में पीड़ितों की ओर से राजस्थान हाई कोर्ट में एक आपराधिक अपील दायर की गई थी। लेकिन पहले हाई कोर्ट ने इस अपील को खारिज कर दिया था। इसके बाद APCR नाम के सामाजिक और कानूनी संगठन की ओर से इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर गंभीरता से सुनवाई करते हुए कहा कि राजस्थान हाई कोर्ट को इस केस की दोबारा सुनवाई करनी होगी। कोर्ट ने साफ निर्देश दिया कि अब इस मामले को सिर्फ देरी या पुराने खारिज आदेश के आधार पर नहीं, बल्कि सबूतों और तथ्यों (मेरिट) के आधार पर देखा जाए।
आमतौर पर अदालतें ज्यादा देरी से दायर मामलों को सुनने से मना कर देती हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में साफ कहा कि देरी इंसाफ के रास्ते में रुकावट नहीं बनेगी। यानी पीड़ितों की बात अब सुनी जाएगी।
यह मामला सैयद सरवर चिश्ती, जो इस धमाके के शिकायतकर्ता हैं, की ओर से लड़ा गया। उनकी तरफ से APCR की लीगल टीम ने पैरवी की। सीनियर एडवोकेट अभय महादेव थिप्से और उनकी टीम ने सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से दलीलें रखीं।
अब इस केस की अगली सुनवाई 24 मार्च 2026 को होगी। जो कानूनी दरवाज़ा पहले बंद कर दिया गया था, सुप्रीम कोर्ट ने उसे फिर से खोल दिया है। अब राजस्थान हाई कोर्ट को इस मामले की फाइलें दोबारा खोलनी होंगी और पीड़ितों की बात ध्यान से सुननी होगी।
यह फैसला सिर्फ एक केस तक सीमित नहीं है, यह संदेश देता है कि इंसाफ देर से सही, लेकिन मिलना चाहिए।




