आलोक कुमार | नई दिल्ली 21 दिसंबर 2025
देश में राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे को लेकर एक बार फिर बड़ा खुलासा हुआ है। इलेक्टोरल ट्रस्ट के ज़रिये राजनीतिक पार्टियों को कुल ₹3,811 करोड़ का चंदा दिया गया, जिसमें से करीब 82 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मिला।
आंकड़ों के मुताबिक, कंपनियां और कॉरपोरेट समूह सीधे पार्टी को चंदा देने के बजाय इलेक्टोरल ट्रस्ट के माध्यम से पैसा देते हैं। इन ट्रस्टों का काम होता है दानदाताओं से पैसा लेकर उसे राजनीतिक दलों में बांटना। लेकिन इस बार के आंकड़े साफ़ दिखाते हैं कि इस व्यवस्था का सबसे ज़्यादा फायदा BJP को हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार, BJP को लगभग ₹3,100 करोड़ से ज़्यादा की राशि मिली, जबकि बाकी सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों को मिलकर सिर्फ़ करीब 18 प्रतिशत चंदा ही मिला। कांग्रेस और अन्य दल इस मामले में काफी पीछे नज़र आए।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में एक ही पार्टी को चंदा मिलना चुनावी बराबरी और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। आम लोगों के मन में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इलेक्टोरल ट्रस्ट वास्तव में सभी दलों के लिए समान अवसर देते हैं या फिर ताकतवर पार्टी को ही ज़्यादा लाभ पहुंचाते हैं।
इलेक्टोरल ट्रस्ट व्यवस्था को पारदर्शिता लाने के लिए बनाया गया था, ताकि यह पता चल सके कि पैसा कहां से आ रहा है और किसे जा रहा है। लेकिन जब आंकड़े इतने एकतरफा हों, तो बहस होना स्वाभाविक है।
यह खबर सिर्फ़ चंदे के आंकड़ों की नहीं है, यह लोकतंत्र, चुनावी निष्पक्षता और राजनीतिक संतुलन से जुड़ा बड़ा सवाल भी उठाती है—क्या पैसे की ताकत चुनावी मैदान को असमान बना रही है?




