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बर्ड फ्लू क्या है और क्यों फिर चर्चा में है?

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एबीसी डेस्क 18 दिसंबर 2025

बर्ड फ्लू, जिसे वैज्ञानिक भाषा में H5N1 वायरस कहा जाता है, आमतौर पर पक्षियों में फैलने वाली बीमारी है। यह ज़्यादातर मुर्गियों, बतखों और जंगली पक्षियों को अपनी चपेट में लेता है। अभी तक यह बीमारी इंसानों में बहुत कम देखी गई है, इसलिए आम लोग इसे पक्षियों की समस्या समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। लेकिन अब भारतीय वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर यह वायरस थोड़ा सा भी बदल गया, तो यह इंसानों तक पहुँच सकता है। यही वजह है कि इसे हल्के में लेना ठीक नहीं है।

पक्षियों से इंसानों तक बीमारी कैसे पहुँच सकती है?

वैज्ञानिकों ने बिल्कुल सीधी भाषा में बताया है कि यह बीमारी कोई हवा में उड़कर अचानक इंसानों पर हमला नहीं करेगी। इसकी शुरुआत बहुत धीरे और चुपचाप हो सकती है। जैसे कोई किसान रोज़ मुर्गियों के साथ काम करता है, कोई पोल्ट्री फ़ार्म में सफ़ाई करता है, या कोई व्यक्ति बीमार पक्षियों को हाथ लगाता है। अगर ऐसे पक्षी पहले से संक्रमित हैं, तो उनके संपर्क में आने से वायरस इंसान के शरीर में जा सकता है। यानी खतरा सबसे पहले उन लोगों को है जो रोज़ जानवरों के बहुत पास रहते हैं।

वैज्ञानिक क्यों चिंता जता रहे हैं?

भारतीय वैज्ञानिकों का कहना है कि वायरस अपने स्वभाव में बदलाव करता रहता है। अभी H5N1 इंसानों से इंसानों में आसानी से नहीं फैलता, लेकिन अगर इसमें एक-दो छोटे बदलाव हो गए, तो यह इंसानों के बीच भी फैल सकता है। वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर मॉडल और डेटा के ज़रिये यह अंदाज़ा लगाया है कि अगर यह बदलाव हुआ, तो बीमारी पहले एक-दो लोगों में दिखेगी, फिर धीरे-धीरे बढ़ सकती है। यही कारण है कि वैज्ञानिक पहले से चेतावनी दे रहे हैं, ताकि हम आंख मूंदकर न बैठे रहें।

इंसान में इसके लक्षण कैसे हो सकते हैं?

अगर यह वायरस किसी इंसान को पकड़ ले, तो इसके लक्षण बिल्कुल साधारण फ्लू जैसे हो सकते हैं। जैसे तेज़ बुख़ार आना, खाँसी, गले में दर्द, शरीर टूटना, ज़्यादा थकान महसूस होना। कुछ मामलों में आँखों में जलन या साँस लेने में तकलीफ़ भी हो सकती है। यही वजह है कि कई बार लोग इसे मामूली सर्दी-खाँसी समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जो आगे चलकर ख़तरनाक साबित हो सकता है।

क्या यह कोरोना जैसी महामारी बन सकता है?

वैज्ञानिक साफ कहते हैं कि अभी घबराने की ज़रूरत नहीं है। यह कोरोना जैसी स्थिति नहीं है। लेकिन वे यह भी कहते हैं कि अगर हमने पिछली महामारियों से कुछ सीखा है, तो वह यही है कि समय रहते चेतावनी को गंभीरता से लेना ज़रूरी है। अगर वायरस ने इंसानों में फैलने की क्षमता हासिल कर ली, तो हालात बिगड़ सकते हैं। इसलिए यह खबर डराने के लिए नहीं, बल्कि सावधान करने के लिए है।

इसका मतलब आम आदमी के लिए क्या है?

इसका मतलब यह नहीं कि लोग डर के मारे मुर्गी खाना छोड़ दें या बाहर निकलना बंद कर दें। इसका मतलब सिर्फ़ इतना है कि स्वच्छता रखें, बीमार पक्षियों या जानवरों से दूरी बनाए रखें और अगर कोई असामान्य लक्षण दिखें तो डॉक्टर से संपर्क करें। सरकार और स्वास्थ्य विभाग का काम है निगरानी बढ़ाना, और आम आदमी का काम है लापरवाही न करना।

इंसानी नज़र से देखें तो असली संदेश क्या है?

यह खबर हमें यह याद दिलाती है कि इंसान, जानवर और प्रकृति — सब एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जब प्रकृति में कुछ गड़बड़ होती है, तो उसका असर इंसानों तक भी पहुँचता है। भारतीय वैज्ञानिकों की यह चेतावनी डर फैलाने के लिए नहीं है, बल्कि यह कहने के लिए है कि अगर हम पहले से तैयार रहें, तो किसी भी बड़ी परेशानी को छोटी रहते ही रोका जा सकता है। समझदारी, सतर्कता और सही जानकारी ही हमारी सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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