अवधेश कुमार । नई दिल्ली 18 दिसंबर 2025
आज भारत के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने एक बहुत अहम मुद्दा उठाया है – वह कहते हैं कि डिजिटल दुनिया में काम करने वाले लोगों, जैसे यू-ट्यूब वीडियो बनाने वाले, ब्लॉग लिखने वाले, इंस्टाग्राम या टिकटॉक-जैसे ऐप पर अपनी कला दिखाने वाले कलाकारों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानून बदलना चाहिए। यानी आज के समय में जिस तरह से इंटरनेट पर नई-नई चीजें बनती और शेयर होती हैं, उस हिसाब से पुराने कानून अब काम नहीं आते। इसलिए राघव चड्ढा चाहते हैं कि भारत का Copyright Act yani कॉपीराइट कानून, जो आज भी 1950-60 के समय के नियमों पर आधारित है, उसे डिजिटल क्रिएटर्स के सुरक्षा-हक़ के लिए सुधारा जाए।
इस मांग के पीछे उनका अनुभव और सोच यह है कि आज बहुत सारे लोग ऑनलाइन अपने विचार, कला और ज्ञान शेयर करते हैं, लेकिन कई बार बिना अनुमति उनके काम की नकल या चोरी कर ली जाती है। यह न सिर्फ उनका अधिकार छीनता है, बल्कि उससे उनकी रोज़ी-रोटी और भविष्य भी प्रभावित हो सकता है। आज इंटरनेट पर वीडियो, लेख, फ़ोटोज़, संगीत और डिज़ाइन — सब कुछ फटाफ़ट फैल जाता है और लोग उसे कहीं भी इस्तेमाल कर लेते हैं। ऐसे में अगर कानून में बदलाव नहीं हुआ, तो ये डिजिटल कलाकार और कंटेंट निर्माता अपने हक़ और मेहनत का पूरा लाभ नहीं उठा पाएंगे।
क्यों यह बहुत ज़रूरी है — एक आम इंसान की द्रष्टि से
सोचिए कि एक युवा लड़का-लड़की ने अपने घर पर बैठकर एक सुंदर वीडियो बनाया, उस पर खूब मेहनत की, उसकी रोज़ी-रोटी इसी से चलती है। लेकिन कोई उसका वीडियो बिना पूछे अपने चैनल या किसी बड़ी कंपनी के प्लेटफ़ॉर्म पर इस्तेमाल कर लेता है और उसे फायदा मिल जाता है। ऐसे हालात में कंटेंट क्रिएटर को न तो सही मान्यता मिलती है और न ही आर्थिक सुरक्षा। यही वजह है कि आज डिजिटल कला और क्रिएटिविटी की दुनिया में कानून भी साथ-साथ चलना चाहिए। अगर आज का कानून अपडेट नहीं होगा, तो मेहनती लोग अपनी कला छोड़ देंगे या डरेंगे कि कोई उनका काम उठा कर चला जायेगा।
राज्यसभा में राघव चड्ढा ने यही बात कहा कि डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स सिर्फ़ मनोरंजन या फ़न नहीं हैं — वे आज की नई अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं। उनकी मेहनत से न केवल उन्हें रोजगार मिलता है बल्कि यह भारत की डिजिटल पहचान और युवा प्रतिभा को दुनिया में मजबूत बनाता है। ऐसे में यह ज़रूरी है कि कानून उनके मेहनत को सुरक्षित रखें ताकि कोई भी व्यक्ति अपने काम की चोरी, नकल या अनुचित इस्तेमाल के खिलाफ सुरक्षित महसूस कर सके।
राघव चड्ढा क्या चाहते हैं?
राघव चड्ढा की सोच बहुत सीधी-सी है — वह कहते हैं कि:
डिजिटल क्रिएटर्स को कानूनी सुरक्षा मिले ताकि उनके काम की चोरी या दुरुपयोग पर रोक लगाई जा सके।
Copyright Act में बदलाव हो और इसे डिजिटल युग के हिसाब से अपडेट किया जाए, ताकि यदि किसी ने ऑनलाइन कंटेंट की नकल या चोरी की तो उसके खिलाफ तेज़ और असरदार कार्रवाई हो सके।
यह बदलाव सिर्फ बड़ी कंपनियों या पारंपरिक कलाकारों तक सीमित न रहे, बल्कि स्मार्टफोन और इंटरनेट पर काम करने वाले छोटे-छोटे कलाकारों को भी न्याय और सुरक्षित अधिकार मिले।
डिजिटल मीडिया को भी वह सम्मान मिले, जैसा किसी किताब या फ़िल्म को मिलता है, ताकि कलाकारों की मेहनत को सही मुक़ाबला-भरी कमाई का मौका मिले।
उनका कहना यह भी है कि डिजिटल दुनिया अब सिर्फ़ मनोरंजन न रह कर लोगों की रोज़ी-रोटी, भविष्य और पहचान बन चुकी है। ऐसे में अगर कानून पीछे रह गया, तो यह बहुत से लोगों के साथ अन्याय होगा।
आखिर यह बदलाव हम किसके लिए चाहते हैं?
आज के समय में बच्चे-युवक, महिलाएँ-बुजुर्ग, वे सब जो इंटरनेट पर कंटेंट बनाते और साझा करते हैं, वे सब डिजिटल दुनिया का हिस्सा बन गए हैं। अगर उन्हें सुरक्षा नहीं मिली, तो एक बड़ी प्रतिभा देश की डिजिटल दुनिया से बाहर हो जाएगी। राघव चड्ढा की मांग इसलिए भी करवाती है कि कोई भी अपनी कला दिखाने से डर न पाए, और उसका काम उसका अपना सम्मान और रोज़ी-रोटी बनाने का साधन बने — न कि कहीं व्यापारिक दुरुपयोग का शिकार।




