अवधेश कुमार । नई दिल्ली 18 दिसंबर 2025
दिल्ली की हवा जब बेहद ख़तरनाक स्तर पर पहुंच जाती है, तब सरकार “ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान” यानी GRAP का सबसे सख़्त चरण—GRAP-IV—लागू करती है। इसका सीधा मतलब है कि अब हालात सामान्य नहीं रहे, और लोगों की सेहत बचाने के लिए कड़े फैसले ज़रूरी हो गए हैं। GRAP-IV लागू होते ही शहर की रफ्तार पर ब्रेक लग जाता है—ताकि हवा में ज़हर और न बढ़े। यह कदम किसी को सज़ा देने के लिए नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों को सांस लेने लायक हवा देने की मजबूरी में उठाया जाता है।
क्या-क्या पूरी तरह बैन रहेगा?
GRAP-IV में सबसे पहले भारी और ज़्यादा प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर रोक लगती है। दिल्ली में डिज़ल से चलने वाले ट्रक (ज़रूरी सेवाओं को छोड़कर) शहर में दाख़िल नहीं हो सकेंगे। निर्माण और तोड़-फोड़ (कंस्ट्रक्शन–डिमोलिशन) का काम लगभग पूरी तरह बंद रहेगा, क्योंकि इससे उड़ने वाली धूल हवा को और ज़हरीला बना देती है। ईंट भट्टे, हॉट-मिक्स प्लांट, स्टोन क्रशर और खनन से जुड़ी गतिविधियां रोक दी जाती हैं। इसके अलावा खुले में कचरा या पत्ते जलाना पहले से ही अपराध है—GRAP-IV में इस पर सख़्ती और बढ़ जाती है। डीज़ल जनरेटर का इस्तेमाल भी ज़्यादातर मामलों में प्रतिबंधित रहता है।
वाहनों और ईंधन पर सख़्ती क्यों?
GRAP-IV के दौरान वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर खास ध्यान दिया जाता है। पुराने और ज़्यादा धुआं छोड़ने वाले वाहन सड़कों से हटाने की कोशिश होती है। कई बार सरकार वाहन संख्या कम करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाती है—ताकि सड़कों पर कम गाड़ियां चलें और धुएं का बोझ घटे। प्रशासन जगह-जगह चेकिंग बढ़ा देता है और नियम तोड़ने पर चालान भी काटे जाते हैं। मकसद साफ है—कम वाहन, कम धुआं, थोड़ी बेहतर हवा।
क्या-क्या ज़रूरी चीज़ें चलती रहेंगी?
GRAP-IV में भी ज़रूरी सेवाओं को राहत दी जाती है। एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, पुलिस, अस्पतालों से जुड़ी सेवाएं, आवश्यक सामान ढोने वाले वाहन—इन पर रोक नहीं लगती। पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसे मेट्रो और बसों को प्रोत्साहित किया जाता है ताकि लोग निजी गाड़ियों की बजाय इन्हें अपनाएं। कुछ जरूरी निर्माण कार्य—जैसे अस्पताल, मेट्रो या राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाएं—सीमित शर्तों के साथ चल सकती हैं, ताकि जरूरी काम पूरी तरह न ठप हों।
स्कूल, दफ्तर और आम ज़िंदगी पर असर
GRAP-IV लागू होने पर बच्चों और बुजुर्गों की सेहत को देखते हुए स्कूलों की कक्षाएं ऑनलाइन करने जैसे फैसले लिए जा सकते हैं। सरकारी और निजी दफ्तरों में वर्क-फ्रॉम-होम या कर्मचारियों की संख्या घटाने पर भी विचार होता है। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे सुबह-शाम बाहर निकलने से बचें, मास्क पहनें और अगर सांस, आंख या गले में दिक्कत हो तो डॉक्टर से संपर्क करें। यह समय एहतियात बरतने का होता है।
आख़िर इतना सख़्त क्यों?
GRAP-IV कोई स्थायी नियम नहीं है, बल्कि आपात स्थिति का जवाब है। जब AQI बेहद खराब या गंभीर स्तर पर पहुंच जाता है, तब सरकार के पास विकल्प कम बचते हैं। थोड़े दिनों की सख़्ती से अगर हवा थोड़ी भी सुधरती है, तो वही राहत बन जाती है। सरकार की अपील है कि लोग सहयोग करें—कम गाड़ी चलाएं, नियम मानें और यह समझें कि हवा बचेगी, तभी हम सब बचेंगे।




