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नोबेल शांति पुरस्कार : विजेता मारिया कोरीना मचाडो की जगह बेटी ने लिया पुरस्कार, बोलीं—मेरी मां कभी हार नहीं मानेंगी

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अंतरराष्ट्रीय डेस्क 10 दिसंबर 2025

नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार एक भावुक पल का गवाह बना। वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो, जिन्हें इस साल का शांति पुरस्कार दिया गया है, खुद समारोह में मौजूद नहीं हो सकीं। उनकी जगह उनकी बेटी एना कोरीना सोसा ने पुरस्कार ग्रहण किया और अपनी मां द्वारा लिखा गया भाषण पढ़ा। मचाडो फिलहाल छिपकर रह रही हैं, इसलिए वह समारोह में नहीं आ सकीं, लेकिन नोबेल समिति ने बताया कि वह सुरक्षित हैं और ओस्लो पहुंचने की कोशिश में हैं।

समारोह की शुरुआत में एना ने बताया कि वह अपनी मां को पिछले दो साल से नहीं देख सकी हैं। उन्होंने कहा कि अपनी मां को गले लगाने के इंतजार में वह अक्सर उन बच्चों के बारे में सोचती हैं, जिन्हें शायद कभी अपनी मां से मिलने का मौका भी नहीं मिल पाता। उनकी ये बातें सुनकर सभागार में मौजूद लोग भावुक हो उठे। नॉर्वे के शाही परिवार समेत पूरा हॉल उन्हें खड़े होकर तालियाँ बजाता रहा।

मारिया कोरीना मचाडो जुलाई 2024 के विवादित चुनाव के बाद से छिपकर रह रही हैं। उस चुनाव को वेनेज़ुएला की विपक्ष और कई देशों ने “धांधली वाला चुनाव” कहा था। चुनाव के बाद देशभर में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए और करीब 2,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया। कई विपक्षी नेताओं को जेल भेज दिया गया, जिससे मचाडो ने अपनी गिरफ्तारी के डर से छिपना चुन लिया। छिपे रहने के बाद भी उन्होंने वीडियो संदेशों और इंटरव्यू के ज़रिए लोगों से लड़ाई जारी रखने की अपील की।

नोबेल शांति पुरस्कार मचाडो को वेनेज़ुएला में तानाशाही से लोकतंत्र तक शांतिपूर्ण परिवर्तन के लिए किए गए संघर्ष के लिए दिया गया है। उनके भाषण में लिखा था कि वेनेज़ुएला के लोग एक दिन फिर से हँसेंगे, प्यार करेंगे और अपनी सड़कों पर संगीत बजता हुआ सुनेंगे। उन्होंने कहा कि “स्वतंत्रता की यह यात्रा हमेशा हमारे अंदर रही है… हम अपने घर लौट रहे हैं।”

समारोह के दौरान यह भी सवाल उठता रहा कि क्या मचाडो अचानक ओस्लो पहुंच जाएंगी। नोबेल समिति ने एक ऑडियो संदेश भी साझा किया, जिसमें मचाडो कहती हैं—“मैं ओस्लो पहुँचने की कोशिश कर रही हूँ… मैं रास्ते में हूँ।” लेकिन समिति के डायरेक्टर ने बताया कि वह देर रात या अगले दिन सुबह तक पहुंच सकती हैं—जो समारोह के लिए बहुत देर हो जाएगा।

उनके दो बच्चे और उनकी मां ओस्लो में मौजूद हैं और आशा कर रहे हैं कि जल्द ही मचाडो उनसे मिल पाएंगी। आख़िरी बार मचाडो को 9 जनवरी को सार्वजनिक रूप से देखा गया था, जब उन्होंने राष्ट्रपति मादुरो के तीसरे कार्यकाल के खिलाफ लोगों को संबोधित किया था।

उनकी जीत ने पूरे वेनेज़ुएला में उनके समर्थकों में नई उम्मीद जगाई है। हालांकि सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर मचाडो ओस्लो गईं, तो उन्हें देश में लौटते ही गिरफ्तार किया जा सकता है। इसके बावजूद उन्होंने छुपते हुए भी अपना संघर्ष जारी रखा हुआ है।

नोबेल पुरस्कार समारोह का यह वर्ष इसलिए खास रहा क्योंकि यह केवल एक राजनीतिक नेता का सम्मान नहीं था, बल्कि उन लाखों वेनेज़ुएला नागरिकों के संघर्ष का सम्मान था जो स्वतंत्रता और लोकतंत्र की उम्मीद में खड़े हैं।

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