महेंद्र सिंह 8 दिसंबर 2025
इंडिगो द्वारा लगातार उड़ानें रद्द किए जाने के मामले पर देश की सर्वोच्च अदालत में सोमवार को महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला, जब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने यह स्वीकार किया कि फ्लाइट रद्द होने के कारण कई यात्रियों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा है। अदालत को बताया गया कि देशभर में उड़ान रद्दीकरण की स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि यात्री न केवल मानसिक तनाव झेल रहे हैं बल्कि लंबी प्रतीक्षा, असुविधा और अनिश्चितता के कारण कई लोगों की स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ गई। इस मुद्दे को उठाते हुए याचिकाकर्ता और अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में 2,500 से अधिक उड़ानें रद्द की जा चुकी हैं और देश के लगभग सभी प्रमुख हवाई अड्डे इससे प्रभावित हुए हैं, ऐसे में शीर्ष अदालत का हस्तक्षेप अत्यंत आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि अदालत एयरलाइंस नहीं चला सकती। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि इस समय स्थिति पर प्राथमिक जिम्मेदारी सरकार और संबंधित नियामक संस्थाओं की है। अदालत ने टिप्पणी की कि भारत सरकार पहले ही इस मामले को गंभीरता से ले चुकी है और समय रहते आवश्यक कार्रवाई भी कर रही है। इसलिए, इस वक्त न्यायालय द्वारा आपातकालीन सुनवाई की जरूरत नहीं है। अदालत ने याचिका को फिलहाल सूचीबद्ध न करने का आदेश देते हुए मामले को बुधवार के लिए शेड्यूल कर दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह स्थिति पर नजर रखे हुए है और यदि आवश्यक हुआ तो आगे दखल देने पर विचार किया जा सकता है।
इंडिगो संकट थमने का नाम नहीं ले रहा। सातवें दिन भी एयरलाइन का परिचालन बुरी तरह प्रभावित रहा और कंपनी को सोमवार को दिल्ली एवं बेंगलुरु एयरपोर्ट से 250 से ज्यादा उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। इससे हजारों यात्री फंसे रहे, कई यात्रियों को एयरपोर्ट पर घंटेभर इंतजार करना पड़ा और कई को आखिरी समय में वैकल्पिक साधनों की तलाश करनी पड़ी। इंडिगो की ओर से पहले ही कहा जा चुका है कि क्रू मैनेजमेंट, रोस्टरिंग और अन्य परिचालन चुनौतियों के कारण उड़ानें प्रभावित हो रही हैं, लेकिन यात्रियों का आरोप है कि कंपनी समय पर जानकारी नहीं दे रही और रिफंड या रीबुकिंग में भी देरी हो रही है।
केंद्र सरकार ने पहले ही इस मामले पर संज्ञान लेते हुए DGCA के माध्यम से इंडिगो से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। DGCA ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच की जा रही है और एयरलाइन को ऑपरेशन स्थिर करने के लिए जरूरी निर्देश दिए गए हैं। उधर, लगातार रद्दीकरण के कारण व्यस्त हवाई अड्डों पर भीड़ बढ़ने लगी है, जिससे यात्रियों को सुरक्षा जांच, बोर्डिंग और सूचना संबंधी प्रक्रियाओं में और कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। छुट्टियों और विवाह सीजन के बीच यह संकट और अधिक गहरा गया है, क्योंकि उड़ानों की मांग चरम पर है और विकल्प सीमित हैं।
फिलहाल स्थिति यह है कि इंडिगो संकट के कारण देश में हवाई यात्रा व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से भले ही फिलहाल राहत नहीं मिली, लेकिन बुधवार की सुनवाई से यात्रियों को उम्मीद है कि अदालत इस मामले पर किसी ठोस दिशा में आगे बढ़ने का आदेश दे सकती है। तब तक यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे एयरपोर्ट जाने से पहले अपनी उड़ान का स्टेटस अवश्य जांच लें और संभव हो तो वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था पर भी विचार करें।




