अंतरराष्ट्रीय डेस्क 7 दिसंबर 2025
जकार्ता में सऊदी अरब ने एक बार फिर अपने वैश्विक धार्मिक नेतृत्व और इस्लाम के मध्यम मार्ग (Moderation) को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता का मजबूत संदेश दिया है। सऊदी अरब के इस्लामिक अफेयर्स, दावत और गाइडेंस मंत्रालय ने इंडोनेशिया के सहयोग से राजधानी जकार्ता की प्रसिद्ध अल-अज़हर मस्जिद में जुमे की नमाज़ का खुतबा दिया। यह पहल न सिर्फ दोनों देशों के धार्मिक रिश्तों को गहरा करती है, बल्कि मुस्लिम दुनिया में संतुलन, सहिष्णुता और आपसी सम्मान जैसे मूल्यों को मजबूत करने की सऊदी सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा भी है। खुतबा सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे, जो इस्लामी शिक्षाओं और आध्यात्मिक संदेशों को करीब से जानना चाहते थे। खुतबे में इस्लाम के वास्तविक संदेश—मध्यमता, नैतिकता, समाज में एकता, और चरमपंथ से दूरी—पर विशेष जोर दिया गया।
इसी कार्यक्रम के तहत मंत्रालय ने जकार्ता में अपना 30वां विशेष प्रशिक्षण कोर्स भी शुरू किया। तीन दिनों तक चलने वाले इस कोर्स में 100 प्रतिभागियों को धार्मिक, शैक्षणिक और वैचारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका मकसद यह है कि इंडोनेशिया के विद्वान, इमाम और दावत से जुड़े लोग इस्लाम के संतुलित और केंद्रीय विचार को अपनी समुदायों तक पहुंचा सकें। इसमें ऐसे कई विषय शामिल किए गए हैं जो युवाओं में गलत विचारों को दूर करने, समाज में सकारात्मक सोच बढ़ाने और धार्मिक संवाद को मजबूत बनाने पर केंद्रित हैं।
सऊदी सरकार का यह कदम मुस्लिम दुनिया में बढ़ती चुनौतियों—कट्टरवाद, गलत धार्मिक व्याख्याओं, सांस्कृतिक टकराव और सामाजिक तनाव—के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। सऊदी अरब लंबे समय से वैश्विक मुस्लिम समुदाय के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने और शिक्षा व प्रशिक्षण के माध्यम से इस्लाम के असल संदेश को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम चलाता आ रहा है। इन्हीं पहलों की कड़ी में अक्टूबर में घाना में भी पाँच दिन का वैज्ञानिक और धार्मिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य वहां के स्थानीय खतीबों और दाइयों को प्रशिक्षित करना था।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियाँ न सिर्फ सऊदी अरब की धार्मिक सॉफ्ट पावर को मजबूत करती हैं, बल्कि मुस्लिम देशों के बीच सांस्कृतिक व आध्यात्मिक सहयोग को भी नई दिशा देती हैं। जकार्ता जैसे महत्वपूर्ण शहर में दिया गया यह खुतबा स्पष्ट करता है कि सऊदी अरब वैश्विक मुस्लिम समुदाय में स्थिरता, शांति और संतुलन को बढ़ावा देने के लिए दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रहा है।
कुल मिलाकर, जकार्ता में सऊदी मंत्रालय के इस कार्यक्रम ने दोनों देशों के धार्मिक रिश्तों को मजबूती दी है और मुस्लिम दुनिया में एक साझा संदेश दिया है—इस्लाम का असली चेहरा मध्यमता, शांति, सहिष्णुता और संतुलन है, और यही संदेश आज की दुनिया में सबसे अधिक ज़रूरी है।




