दिल्ली बीजेपी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर आज एक ऐसी विवादित और मॉर्फ्ड तस्वीर पोस्ट की गई, जिसने न सिर्फ राजनीतिक मर्यादाओं को कलंकित किया, बल्कि सत्ता की अहंकारी मानसिकता को भी पूरी तरह बेनकाब कर दिया। पोस्ट के साथ लिखा गया— “SIR से सबसे ज़्यादा तकलीफ़, घुसपैठियों के इन हमदर्दों को है”—यह वाक्य ऐसी जहरीली नफरत का नमूना है जिसे शायद बीजेपी अब अपनी पहचान और राजनीतिक रणनीति का स्थायी हिस्सा बना चुकी है। राहुल गांधी और मुस्लिम समुदाय को सीधे-सीधे निशाना बनाने का यह तरीका बताता है कि दिल्ली बीजेपी के लिए लोकतांत्रिक संवाद नहीं, बल्कि मनगढ़ंत छवियों और नफरत फैलाने वाला प्रचार ही प्राथमिकता बन चुका है। यह सवाल भी बड़ा है कि क्या सत्ता में बैठे इन नेताओं को अब किसी कार्रवाई, किसी कानून, किसी मर्यादा का भय ही नहीं बचा?
इसी बीच, कांग्रेस के सोशल मीडिया वॉलंटियर मंजीत घोषी का मामला सत्ता के दोहरे मापदंडों को और गहराई से उजागर करता है। मंजीत ने बस एक पोस्ट किया था—#VoteChori के खिलाफ, एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी आवाज उठाने का संवैधानिक अधिकार। लेकिन उसके तुरंत बाद उन्हें गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया गया, जैसे उन्होंने कोई देशद्रोह कर दिया हो। एक तरफ़ एक युवा कार्यकर्ता जेल की सलाखों के पीछे सिर्फ इसलिए सड़ रहा है क्योंकि उसने चुनाव और लोकतंत्र पर सवाल उठाए; दूसरी तरफ दिल्ली बीजेपी खुलेआम राहुल गांधी की एडिटेड छवि प्रसारित कर रही है और उस पर कोई कार्रवाई न होना बताता है कि कानून अब दो दिशाओं में काम करता है—एक कमजोरों के लिए कठोर, और सत्ता के ख़िलाफ़ कुछ न बोलने वाले विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग के लिए बिल्कुल नरम।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि नफरत और गलत सूचना पर आधारित इस राजनीति को रोकने के लिए कांग्रेस का लीगल सेल कहाँ है? कांग्रेस का कानूनी तंत्र भाजपा की इस खुलेआम गुंडागर्दी, मॉर्फ्ड इमेज के प्रसार, और कार्यकर्ताओं पर हो रहे दमनात्मक कार्रवाई पर पूरी तरह चुप है। यह वही चुप्पी है, जो विपक्ष को कमजोर करती है और बीजेपी जैसी ताकतों को और भी निरंकुश बना देती है। राहुल गांधी की छवि खराब करने के लिए फैलाई गई यह फोटो न सिर्फ उनकी गरिमा का अपमान है बल्कि भारतीय राजनीति में बढ़ती वैमनस्यता, घृणा और बदले की भावना का आईना भी है। जब सत्ता पक्ष खुलेआम गलत छवियां पोस्ट करे और विपक्ष का लीगल सेल प्रतिक्रिया तक न दे, तो सवाल उठना ज़रूरी है कि आखिर लोकतंत्र की इस लड़ाई में विपक्ष लड़ ही किस रणनीति से रहा है?
यह पूरा प्रकरण इस बात का ताज़ा उदाहरण है कि कैसे बीजेपी नफरत, गलत जानकारी और डिजिटल गुंडागर्दी के सहारे अपनी राजनीति चलाना चाहती है, और कैसे विपक्ष की ख़ामोशी उन ताकतों को और बढ़ावा दे रही है। राहुल गांधी को निशाना बनाना सिर्फ एक उद्देश्य नहीं—यह उनके माध्यम से उस समुदाय को भी बदनाम और डराना है जिसे बीजेपी अपनी चुनावी राजनीति में हमेशा टारगेट करती आई है। यह सिर्फ एक मॉर्फ्ड फोटो नहीं—यह लोकतंत्र, विपक्ष, और अल्पसंख्यक समुदाय पर सीधा हमला है।




