ऑस्ट्रेलिया की धरती पर भारतीय बैडमिंटन का परचम एक बार फिर बुलंद हो गया, जब युवा स्टार लक्ष्य सेन ने ऑस्ट्रेलिया ओपन 2025 सुपर-500 टूर्नामेंट के फाइनल में जापान के युशी तनाका को सिर्फ 38 मिनट में हराकर खिताब अपने नाम कर लिया। यह जीत सिर्फ स्कोर की नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता, रणनीति और आक्रामक खेल की भी जीत मानी जा रही है। 21-15, 21-11 के स्ट्रेट गेम्स में मिली यह जीत दर्शाती है कि लक्ष्य ने अपनी फॉर्म, फिटनेस और आत्मविश्वास को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। शुरुआती रैलियों में तनाका ने कुछ दम दिखाने की कोशिश की, लेकिन लक्ष्य की तेज मूवमेंट, कॉर्ट कवरेज और सटीक शॉट प्लेसमेंट के सामने जापानी खिलाड़ी पूरी तरह बिखर गया। मैच के दौरान लक्ष्य ने जिस तरह नेट के पास नियंत्रण बनाए रखा और लंबी रैलियों को अपने पक्ष में मोड़ा, उसने दर्शकों और विशेषज्ञों दोनों को प्रभावित किया।
कठिन दौर से वापसी: चोट, फ्लॉप प्रदर्शन और आलोचनाओं के बाद नई शुरुआत
यह जीत लक्ष्य सेन के करियर के संदर्भ में और भी महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि पिछले कुछ महीनों में वे फॉर्म में गिरावट, शुरुआती राउंड हार, फिटनेस की समस्या और मानसिक दबाव से जूझ रहे थे। कई टूर्नामेंटों में पहले ही दौर में बाहर होने के बाद विशेषज्ञों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया था कि क्या लक्ष्य अपनी पुरानी चमक वापस ला पाएंगे। लेकिन ऑस्ट्रेलिया ओपन ने उन सभी सवालों का जवाब दे दिया है। लक्ष्य ने पूरे टूर्नामेंट में लगातार शानदार प्रदर्शन किया—क्वार्टर फ़ाइनल में दमदार जीत, सेमीफ़ाइनल में टॉप रैंकिंग खिलाड़ियों को हराकर फाइनल में पहुंचना और फिर निर्णायक मुकाबले में बेहतरीन प्रदर्शन करके खिताब जीतना उनके दृढ़ संकल्प की मिसाल है। यह खिताब न केवल उनके आत्मविश्वास को वापस लाएगा, बल्कि विश्व रैंकिंग में भी उन्हें मजबूत स्थिति देगा।
फाइनल में रणनीति का कमाल: तनाका को किया पूरी तरह बेअसर
फाइनल मुकाबले में लक्ष्य सेन का गेम प्लान बिल्कुल स्पष्ट था—तनाका को लंबी रैलियों में उलझाना, उनके डिफेंस को तोड़ना और नेट पर नियंत्रण स्थापित करना। पहले गेम में 6-3 की शुरुआती बढ़त लेने के बाद तनाका ने 13-12 तक वापसी की कोशिश की, लेकिन लक्ष्य ने उसी समय मैच का रुख मोड़ दिया। उन्होंने तेजी से पॉइंट्स जुटाए और तनाका को बैकफुट पर धकेल दिया। दूसरे गेम में तो मुकाबला एकतरफा हो गया। लक्ष्य ने 11-5 की बढ़त के साथ ब्रेक लिया और उसके बाद तनाका कभी मैच में लौट नहीं पाए। स्मैश, ड्रॉप, क्रॉस-कोर्ट नेट प्लेसमेंट और बॉडी स्मैश—लक्ष्य का हर शॉट असरदार साबित हुआ। कोर्ट पर उनका आत्मविश्वास इतना ज्यादा था कि प्रत्येक पॉइंट के साथ भीड़ का उत्साह भी बढ़ता गया।
भारत के लिए बड़ी खुशी: उभरते सितारे की चमक
इस जीत ने भारतीय बैडमिंटन जगत में नई उम्मीदें जगा दी हैं। पी. वी. सिंधु और किदांबी श्रीकांत जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के फॉर्म में गिरावट के बीच, लक्ष्य सेन जैसे युवा खिलाड़ियों की सफलता भारत के भविष्य को मजबूत करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लक्ष्य में लंबी अवधि तक अंतरराष्ट्रीय सर्किट पर दबदबा बनाए रखने की क्षमता है। उनकी फिटनेस, कोर्ट पर तेजी, मानसिक मजबूती और लगातार सुधार की प्रवृत्ति उन्हें विश्व बैडमिंटन के शीर्ष खिलाड़ियों की श्रेणी में पहुंचा सकती है।
आगे की राह: क्या लक्ष्य बनाए रख पाएंगे यह लय?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या लक्ष्य सेन इस प्रदर्शन को आने वाले टूर्नामेंटों में भी जारी रख पाएंगे? सुपर-500 टूर्नामेंट जीतने के बाद उनकी चुनौती और बढ़ जाएगी—विश्व चैंपियनशिप, सुपर-750, सुपर-1000 और ओलंपिक क्वालिफिकेशन मुकाबले उनके सामने खड़े हैं। इसके लिए उन्हें नई केवल शारीरिक फिटनेस बनाए रखनी होगी, बल्कि मानसिक रूप से भी मजबूत रहना होगा। बैडमिंटन जैसे तेज़ और शारीरिक मांग वाले खेल में निरंतरता ही सबसे बड़ी कुंजी मानी जाती है। यदि लक्ष्य इस लय को कायम रखते हैं, तो आने वाले समय में वे भारत के लिए कई और बड़े खिताब जीत सकते हैं और बैडमिंटन में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिख सकते हैं।
38 मिनट में मिली यह दमदार जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि यह घोषणा है कि लक्ष्य सेन वापस आ गए हैं—और इस बार पहले से ज्यादा खतरनाक, परिपक्व और तैयार। भारतीय खेल प्रेमियों के लिए यह गर्व का क्षण है और बैडमिंटन जगत के लिए एक स्पष्ट संदेश—लक्ष्य सेन अब सिर्फ उभरता सितारा नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक मजबूत दावेदार बन चुके हैं।




