Home » International » बांग्लादेश हाई कोर्ट का बड़ा झटका: अडानी ग्रुप की बिजली डील पर लगाम

बांग्लादेश हाई कोर्ट का बड़ा झटका: अडानी ग्रुप की बिजली डील पर लगाम

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

अंतरराष्ट्रीय डेस्क 20

ढाका — बांग्लादेश हाई कोर्ट ने बुधवार को भारत के अडानी ग्रुप को एक बड़ा झटका देते हुए आदेश दिया कि वह Bangladesh Power Development Board (BPDB) के साथ चल रहे भुगतान विवाद के मामले में सिंगापुर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर (SIAC) में चल रही मध्यस्थता प्रक्रिया को तुरंत रोके। अदालत ने साफ कहा है कि जब तक सरकार-नियुक्त जांच समिति पूरे बिजली खरीद समझौते (PPA) की समीक्षा नहीं कर लेती, तब तक किसी भी तरह की मध्यस्थता आगे नहीं बढ़ सकती। अदालत ने यह कदम उस समय उठाया जब बांग्लादेश सरकार ने आरोप लगाया कि अडानी के साथ बिजली समझौता अत्यधिक महंगा, असंतुलित और राष्ट्रीय हित के प्रतिकूल है।

फैसले की पृष्ठभूमि बेहद महत्वपूर्ण है। अडानी पावर का झारखंड के गोड्डा में बना 1,600 मेगावॉट का कोयला-आधारित प्लांट विशेष रूप से बांग्लादेश को बिजली भेजने के लिए बनाया गया था। 2017 में हुए PPA के अनुसार BPDB इस संयंत्र से बिजली खरीद रहा है। लेकिन बांग्लादेश के ऊर्जा विशेषज्ञों और वकीलों का दावा है कि इस अनुबंध में अडानी को प्रति यूनिट असामान्य रूप से ऊंची दर दी गई—वित्त वर्ष 2024 में लगभग 14.87 टाका प्रति यूनिट—जो भारत की अन्य कंपनियों से खरीदी जा रही बिजली से लगभग 50% अधिक है। यही नहीं, अनुबंध में कर-छूट और शुल्क माफी जैसे प्रावधान भी दिए गए, जिन पर अब सवाल उठ रहे हैं और अदालत ने इन्हीं संदेहों की जांच के लिए समिति बनाई है।

स्थिति तब और विस्फोटक हो गई जब पता चला कि बांग्लादेश सरकार पर अडानी पावर का लगभग 900 मिलियन डॉलर (करीब ₹7,500 करोड़) बकाया है, जबकि देश पहले ही गंभीर आर्थिक दबाव से गुजर रहा है। विपक्ष ने इसे सीधे-सीधे ‘लूट’ बताया है और सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने प्रधानमंत्री शेख हसीना के समय में अडानी के साथ ऐसा समझौता किया जिसमें बांग्लादेश की वित्तीय स्थिति की कोई परवाह नहीं की गई। अदालत में दाखिल याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि इस तरह के अनुबंधों की वजह से देश की ऊर्जा लागत आसमान छू रही है।

अडानी ग्रुप ने कोर्ट के आदेश पर अपनी आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि PPA में स्पष्ट लिखा है कि सभी विवादों का निपटारा सिंगापुर के मध्यस्थता केंद्र में होगा और इसलिए बांग्लादेश की अदालत को इस मामले की अधिकारिता (jurisdiction) नहीं है। लेकिन अदालत ने इस दलील को दरकिनार करते हुए कहा कि यदि देश को आर्थिक नुकसान हो सकता है, तो अदालत को हस्तक्षेप का पूरा अधिकार है।

इस फैसले का असर दोनों देशों के ऊर्जा संबंधों पर पड़ सकता है। भारत-बांग्लादेश बिजली व्यापार दक्षिण एशिया के सबसे बड़े ऊर्जा लेन-देन में गिना जाता है। लेकिन अगर जांच में यह पाया गया कि अनुबंध एकतरफा, महंगा या राष्ट्रीय हित के खिलाफ था, तो बांग्लादेश सरकार इसे रद्द भी कर सकती है—जैसा कि हाल के बयान में संकेत दिया गया कि “यदि भ्रष्टाचार सिद्ध हुआ तो सौदा खत्म किया जा सकता है।” यह कदम दक्षिण एशिया में निजी ऊर्जा निवेश के लिए एक बड़ा झटका होगा और भारत के लिए भी कूटनीतिक चुनौती।

संक्षेप में, बांग्लादेश हाई कोर्ट के इस फैसले ने अडानी ग्रुप पर न केवल कानूनी दबाव बढ़ाया है, बल्कि भारत-बांग्लादेश ऊर्जा राजनीति को भी हिला दिया है। आने वाले हफ्तों में जांच समिति की रिपोर्ट यह निर्धारित करेगी कि यह मामला केवल भुगतान विवाद था या एक ऐसी संरचनात्मक गलती जो बांग्लादेश को वर्षों तक आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाती रहती।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments