पटना/ नई दिल्ली 12 नवंबर 2025
बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर दिखा है। Axis My India Exit Poll ने अपने ताज़ा आंकड़ों में चौंकाने वाला खुलासा किया है — इस बार बिहार के मतदाताओं के बीच सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री चेहरा तेजस्वी यादव उभरे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जनता ने उन्हें “सुपर सीएम फेस” के तौर पर चुना है, जबकि लंबे समय तक बिहार की राजनीति की धुरी रहे नीतीश कुमार इस सूची में दूसरे नंबर पर खिसक गए हैं। इससे भी ज़्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि तीसरे स्थान पर एक अप्रत्याशित चेहरा सामने आया है, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
Axis My India के अनुसार, तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री पसंदगी की रेस में 40% से ज़्यादा जनता का समर्थन हासिल किया है। यह आंकड़ा पिछले चुनावों के मुकाबले लगभग दोगुनी बढ़त दर्शाता है। वहीं, नीतीश कुमार, जो 2020 तक सबसे विश्वसनीय चेहरा माने जाते थे, अब मात्र 28% समर्थन के साथ दूसरे नंबर पर हैं। तीसरे स्थान पर जो नाम उभरा है, वह है चिराग पासवान — लोजपा (रामविलास) के युवा नेता, जिन्होंने पिछले कुछ महीनों में अपने बयानों और चुनावी रणनीतियों से युवाओं के बीच लोकप्रियता हासिल की है। सर्वे में उन्हें करीब 12% लोगों ने “भावी मुख्यमंत्री” के रूप में पसंद किया है।
यह नतीजे बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में नया मोड़ लेकर आए हैं। यह पहली बार है जब नीतीश कुमार, जो दो दशकों से राज्य की सत्ता और राजनीति के केंद्र में रहे हैं, मुख्यमंत्री पसंदगी की सूची में पीछे हुए हैं। वहीं, तेजस्वी यादव का यह उभार इस बात का संकेत है कि बिहार की राजनीति में अब पीढ़ी परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि युवा मतदाताओं, पहली बार वोट डालने वालों और बेरोजगारी से जूझ रहे वर्ग ने इस बार तेजस्वी को “नए दौर के नेता” के रूप में देखा है।
Axis My India ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि इस बार बिहार में जातीय समीकरणों की तुलना में विकास, रोजगार और नेतृत्व की विश्वसनीयता ज्यादा मायने रखी। यही कारण है कि तेजस्वी यादव का “नौकरी, शिक्षा और बदलाव” का एजेंडा मतदाताओं को लुभाने में सफल रहा। सर्वे के मुताबिक, 18–35 आयु वर्ग के 62% मतदाताओं ने तेजस्वी को बेहतर मुख्यमंत्री चेहरा बताया, जबकि 50 वर्ष से ऊपर के मतदाताओं में नीतीश कुमार के प्रति अभी भी सम्मान और भरोसा कायम है।
नीतीश कुमार की गिरती लोकप्रियता पर राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लंबे शासन काल, बदलते गठबंधनों और पुराने तंत्र के थकान प्रभाव ने उनकी छवि को कमजोर किया है। वहीं, तेजस्वी यादव लगातार एक ऊर्जावान और आक्रामक नेता के रूप में उभरे हैं, जो न केवल विपक्ष का चेहरा हैं बल्कि अब खुद को “सीएम इन वेटिंग” के रूप में भी पेश कर चुके हैं। Axis My India की रिपोर्ट के बाद आरजेडी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त जोश देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर “#TejashwiSuperCM” ट्रेंड कर रहा है और पार्टी नेता इसे “जनता का जनादेश” बता रहे हैं।
तीसरे स्थान पर आए चिराग पासवान की स्थिति ने भी कई समीकरण बदल दिए हैं। भले ही उनकी पार्टी का संगठनात्मक ढांचा बड़ा नहीं है, लेकिन युवाओं के बीच उनकी छवि “आक्रामक और साहसी” नेता के रूप में बन रही है। चिराग ने खुद को “नीतीश विरोधी” और “युवा बिहार” के प्रतिनिधि के तौर पर पेश किया है। यही कारण है कि सीमांचल और पटना बेल्ट में उन्हें अप्रत्याशित लोकप्रियता मिली है।
इस सर्वे के आने के बाद बीजेपी और जेडीयू दोनों खेमों में हलचल तेज हो गई है। एनडीए कैंप में यह चिंता बढ़ गई है कि अगर तेजस्वी मुख्यमंत्री चेहरा बनकर जनता के दिल में जगह बना रहे हैं, तो आने वाले नतीजों में यह रुझान वोट शेयर में भी झलक सकता है। वहीं, महागठबंधन खेमे में जश्न का माहौल है। आरजेडी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा — “तेजस्वी अब केवल लालू यादव के बेटे नहीं, बल्कि बिहार के लोगों के दिल का नेता बन चुके हैं।”
बिहार की राजनीति में यह “सीएम फेस सर्वे” न केवल चुनावी हवा का रुख दिखाता है बल्कि भविष्य के गठबंधनों का संकेत भी देता है। अगर तेजस्वी यादव जनता की पहली पसंद बने रहते हैं, तो आने वाले दिनों में महागठबंधन का चेहरा और भी मजबूत होगा। वहीं नीतीश कुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी — अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता और भरोसे को फिर से कायम रखना।
दिल्ली से पटना तक अब यही चर्चा है — बिहार की जनता क्या 2025 में सत्ता का रुख पूरी तरह बदल देगी? क्या नीतीश युग का अंत और तेजस्वी युग की शुरुआत हो चुकी है? Axis My India के इस एग्जिट पोल ने इन सवालों को और गहराई से हवा दे दी है।




