पटना 12 नवंबर 2025
बिहार चुनाव 2025 के नतीजों से पहले सियासी माहौल अपने चरम पर है। हर तरफ चर्चाएं हैं कि कौन सत्ता की कुर्सी पर बैठेगा, लेकिन इस बीच आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने पूरे आत्मविश्वास के साथ बड़ा दावा कर राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है। तेजस्वी यादव ने कहा है कि महागठबंधन इस बार बिहार में 160 से ज़्यादा सीटें जीतने जा रहा है। उन्होंने एक तरह से सभी एग्जिट पोल्स को खारिज करते हुए कहा कि जो सर्वे चैनल्स और एजेंसियां एनडीए की जीत का दावा कर रही हैं, वे या तो जमीनी सच्चाई से अनजान हैं या फिर एक तय नैरेटिव को फैलाने की कोशिश कर रही हैं। तेजस्वी का बयान उस वक्त आया है जब 95% एक्जिट पोल्स ने एनडीए को बहुमत में दिखाया है, और सिर्फ कुछ सर्वे ही महागठबंधन के पक्ष में हैं। लेकिन तेजस्वी ने साफ शब्दों में कहा है कि “इस बार जनता ने चुपचाप वोट दिया है और जनता का जनादेश हमारे पक्ष में है। 14 नवंबर को जो नतीजे आएंगे, वो सबको चौंका देंगे।”
तेजस्वी यादव का यह बयान महज एक चुनावी दावा नहीं, बल्कि राजनीतिक आत्मविश्वास का ऐलान माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह युवाओं, किसानों, महिलाओं और गरीब तबकों ने इस चुनाव में रिकॉर्ड वोटिंग की है, वह इस बात का संकेत है कि जनता बदलाव चाहती है। तेजस्वी ने कहा — “एग्जिट पोल वाले एयर-कंडीशंड रूम में बैठे-बैठे बिहार का मूड नहीं समझ सकते। वे आंकड़े बनाते हैं, हम ज़मीन पर जनता के बीच जाकर उनकी नब्ज़ पढ़ते हैं। जिन लोगों ने हमारे खिलाफ झूठ फैलाने की कोशिश की, उन्हें अब जनता ने जवाब दे दिया है।” तेजस्वी के मुताबिक, इस बार महागठबंधन को न केवल ग्रामीण इलाकों से बल्कि शहरी सीटों से भी अप्रत्याशित समर्थन मिला है। उनका दावा है कि सीमांचल, मिथिलांचल, मगध और भोजपुर बेल्ट में भारी मतदान ने महागठबंधन के पक्ष में माहौल बना दिया है।
तेजस्वी यादव ने अपने बयान में यह भी कहा कि बिहार में इस बार जातीय समीकरण नहीं, बल्कि विकास और बेरोजगारी मुद्दा बना है। उन्होंने कहा कि महागठबंधन ने जनता के बीच असल सवाल रखे — नौकरी, शिक्षा, स्वास्थ्य और महंगाई। “लोग अब जाति देखकर नहीं, अपना भविष्य देखकर वोट दे रहे हैं,” उन्होंने कहा। तेजस्वी का तर्क है कि एनडीए सरकार ने 15 वर्षों में बिहार को सिर्फ ठहराव और पलायन दिया है, जबकि महागठबंधन ने युवाओं को नई दिशा देने का वादा किया है। उन्होंने कहा कि जिन सर्वे में हमें पीछे दिखाया गया है, वही सर्वे 2020 में भी हमें कमतर दिखा रहे थे, लेकिन तब भी आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी बनकर आई थी। “हमारी जमीनी पकड़ और जनता का भरोसा इन टीवी स्टूडियो में बैठे लोगों के हिसाब से नहीं चलता। इस बार तस्वीर साफ होगी — जनता ने इस बार हमें पूरा बहुमत दिया है,” तेजस्वी ने कहा।
पटना में पत्रकारों से बात करते हुए तेजस्वी यादव ने तीखे अंदाज़ में कहा कि बिहार में चुनाव “विकास बनाम दिखावा” का था और अब जनता ने दिखावा करने वालों को जवाब दे दिया है। उन्होंने कहा कि महागठबंधन की लहर इस बार हर वर्ग में दिख रही है — मुस्लिम, यादव, दलित, महादलित, पिछड़े वर्ग, महिलाएं, युवा और किसान — सबने एक सुर में बदलाव के लिए वोट डाला है। तेजस्वी ने आगे कहा — “हमने न तो धर्म की राजनीति की, न जाति की। हमने सिर्फ काम की बात की। यही फर्क हमें बहुमत दिलाने वाला है। बिहार अब ठहराव से निकलना चाहता है।”
तेजस्वी का यह दावा बिहार की सियासत में उस वक्त आया है जब एनडीए और जेडीयू-बीजेपी के बीच भीतरखाने मतभेदों की चर्चा तेज है। दूसरी तरफ़ कांग्रेस और आरजेडी ने पहले से ही पोस्ट-रिजल्ट रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। तेजस्वी के मुताबिक, महागठबंधन को इस बार न सिर्फ़ ग्रामीण क्षेत्रों में बल्कि पहली बार शहरी सीटों पर भी अप्रत्याशित समर्थन मिला है — “जो लोग सोचते हैं कि पटना, गया या भागलपुर में एनडीए मजबूत है, वे 14 नवंबर को देख लेंगे कि ये इलाक़े अब किसके साथ हैं।”
तेजस्वी यादव ने बीजेपी और जेडीयू पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि “एग्जिट पोल बनाने वाले वही लोग हैं जो सरकार के प्रोजेक्ट्स को एडवर्टाइज़ करते हैं। जब 2020 में उन्होंने हमें हरा दिया था, तब भी हमने सबसे ज्यादा सीटें जीती थीं। इस बार हमने संगठन को और मज़बूत किया है, बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं ने जमकर काम किया है। ये चुनाव बिहार के युवाओं की उम्मीदों का है, और वो उम्मीदें महागठबंधन के साथ हैं।” उन्होंने कहा कि वे नतीजों के बाद किसी “पोस्ट-पोल अरेंजमेंट” की ज़रूरत ही नहीं मानते, क्योंकि जनता ने पहले ही स्पष्ट जनादेश दे दिया है।
राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि तेजस्वी यादव का यह बयान महागठबंधन कार्यकर्ताओं के मनोबल को मजबूत करने और विपक्षी खेमे में अनिश्चितता का माहौल पैदा करने की कोशिश है। लेकिन तेजस्वी का आत्मविश्वास और उनका अंदाज़ यह भी दिखाता है कि आरजेडी को इस बार अपने प्रदर्शन पर भरोसा है। उनके समर्थक इस बयान को “सिर्फ दावा नहीं, इशारा” मान रहे हैं — कि तेजस्वी के पास शायद ग्राउंड रिपोर्ट्स हैं जो महागठबंधन के पक्ष में भारी झुकाव दिखा रही हैं।
बिहार की सियासत अब पूरी तरह “फोटो फिनिश” की ओर बढ़ चुकी है। दिल्ली से लेकर पटना तक सत्ता के गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है। लेकिन तेजस्वी यादव का यह दावा कि “महागठबंधन 160 से ज़्यादा सीटें जीतेगा”— न सिर्फ राजनीतिक माहौल को बदल रहा है, बल्कि यह बताता है कि विपक्ष अब नतीजों से पहले ही अपनी जीत की कहानी लिखने में जुट गया है। 14 नवंबर की दोपहर जब नतीजे सामने आएंगे, तब यह तय होगा कि तेजस्वी का यह आत्मविश्वास सच्चाई में बदलेगा या महज़ बयानबाज़ी साबित होगा। पर फिलहाल एक बात तय है — बिहार की हवा में अब भी वही सवाल गूंज रहा है —
“क्या सच में बिहार ने बदलाव के लिए वोट दिया है, या फिर एक बार फिर नीतीश-बीजेपी की जोड़ी वापसी करेगी?”




