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कर्नाटक की राजनीति में उथल-पुथल तेज, दिल्ली तक बढ़ी हलचल — सत्ता और संगठन में बड़े बदलावों के संकेत

कर्नाटक की राजनीति इन दिनों अभूतपूर्व उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। सूबे की सत्ता और संगठन, दोनों मोर्चों पर हालात अचानक अस्थिर दिखने लगे हैं। मुख्यमंत्री सिद्धरमैया आगामी 15 तारीख को दिल्ली आने वाले हैं, लेकिन पार्टी के विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार कांग्रेस हाईकमान ने फिलहाल किसी भी औपचारिक मुलाक़ात की अनुमति नहीं दी है। यह निर्णय अपने आप में कई तरह के राजनीतिक संकेत देता है—खासतौर पर तब, जब राज्य सरकार के भीतर असंतोष की खबरें तेज़ी से फैल रही हों और मुख्यमंत्री खुद दिल्ली का रुख कर रहे हों।

इधर, सिद्धरमैया के समर्थक विधायक भी सक्रिय हो गए हैं। वे शक्ति प्रदर्शन के ज़रिए यह बताने में जुटे हैं कि मुख्यमंत्री अभी भी विधायकों के बीच सबसे मज़बूत और लोकप्रिय विकल्प हैं। विधायकों की यह लामबंदी साफ तौर पर दिखाती है कि पार्टी के भीतर कुछ बड़े निर्णयों की आहट उन्हें पहले ही मिल चुकी है और वे किसी भी परिस्थिति में सिद्धरमैया की स्थिति को मज़बूत बनाए रखना चाहते हैं। इस शक्ति प्रदर्शन से दिल्ली तक संदेश गया है कि मुख्यमंत्री को हटाना आसान नहीं होगा, क्योंकि संगठन के भीतर उनका मजबूत आधार मौजूद है।

उधर, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी दिल्ली में काफी सक्रिय नज़र आ रहे हैं। कर्नाटक कांग्रेस की राजनीति में सिद्धरमैया और डीके शिवकुमार दो ध्रुव माने जाते हैं, और दोनों की गतिविधियाँ अचानक तेज़ होना यह संकेत दे रहा है कि भविष्य में किसी बड़े फ़ैसले की तैयारी चल रही है। हाईकमान ने सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं कि कर्नाटक के किसी भी नेता, मंत्री या विधायक की दिल्ली में किसी भी शीर्ष नेता से मुलाक़ात की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस आदेश के बाद राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी शीर्ष स्तर पर सरकार और संगठन दोनों में कठोर समीक्षा कर रही है।

राजनीतिक गलियारों में इस समय जो चर्चाएँ तेज हैं, वह और भी दिलचस्प हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि अगले कुछ महीनों में कांग्रेस कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन, कैबिनेट में व्यापक फेरबदल और संगठन में नए समीकरण तैयार कर सकती है। यह भी कहा जा रहा है कि हाल ही में सामने आए कई विवाद, भ्रष्टाचार आरोप, क्षेत्रीय असंतोष और सत्ता-संगठन के बीच दूरी को देखते हुए पार्टी चाहती है कि 2025 से पहले कर्नाटक में “बड़ी सफाई” कर दी जाए। फिलहाल, दिल्ली और बेंगलुरु—दोनों राजनीतिक ध्रुवों पर तनाव चरम पर है और आने वाले दिनों में कोई बड़ा फैसला माहौल को और गर्म कर सकता है।

 

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